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निजी स्कूलों पर शासन की सख्ती: अब NCERT और CG बोर्ड की पुस्तकें ही मान्य, मनमानी पर लगेगा अंकुश

बिलासपुर: न्यायधानी सहित राज्य में निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए शासन ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। अब सभी निजी विद्यालयों में केवल एनसीईआरटी (NCERT) और छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CG बोर्ड) की निर्धारित पुस्तकें ही पढ़ाई जाएंगी। इसके साथ ही यूनिफॉर्म, बैग, किताब और कॉपी की खरीद को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।

एवीके न्यूज़ सर्विस की पहल, शासन की कार्रवाई

अभिभावकों की लगातार शिकायतों और मीडिया द्वारा उठाए गए मुद्दों के बाद शासन हरकत में आया। अभिभावकों ने आरोप लगाया था कि निजी स्कूल महंगे निजी प्रकाशनों की किताबें थोपकर कमीशनखोरी कर रहे हैं, जिससे शिक्षा का खर्च कई गुना बढ़ गया है। इस पर संज्ञान लेते हुए सरकार ने स्पष्ट किया कि अब किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान और सख्त लहजो में कहा

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अप्रैल 2026 में निजी स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी फीस बढ़ोतरी और किताबों की कीमतों पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा है कि प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  सीएम साय ने चेतावनी दी है कि यदि स्कूलों ने मनमाने ढंग से फीस बढ़ाई या अभिभावकों पर दबाव डाला, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं पड़ने देगी। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा है कि शिक्षा को व्यापार नहीं बनने दिया जाएगा।उन्होंने निजी स्कूलों को चेतावनी दी है कि शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत गरीब बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित रखना अनिवार्य है, इसमें कोताही बरतने पर मान्यता रद्द करने की कार्रवाई हो सकती है।

क्या हैं नए निर्देश?

  • सभी निजी स्कूलों में केवल NCERT और CG बोर्ड की किताबें अनिवार्य होंगी।
  • किसी भी विशेष दुकान से यूनिफॉर्म, किताब या कॉपी खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा।
  • स्कूल प्रबंधन द्वारा तय दुकान या प्रकाशक से खरीद का दबाव डालना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
  • फीस वृद्धि भी अब निर्धारित नियमों के तहत ही होगी।
  • कलेक्टर करेंगे निगरानी।

शासन ने जिला स्तर पर निगरानी की जिम्मेदारी कलेक्टरों को सौंपी है। प्रत्येक जिले में प्रशासनिक टीम स्कूलों का निरीक्षण करेगी और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

फीस वृद्धि पर भी लगाम

निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। फीस वृद्धि के लिए निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा और अभिभावकों की सहमति के बिना वृद्धि नहीं की जा सकेगी।

अभिभावकों को राहत

इस निर्णय से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से वे महंगी किताबों, अनावश्यक खर्च और दबावपूर्ण नियमों से परेशान थे। अब शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और सुलभ बनने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रशासन की सख्त चेतावनी

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मान्यता रद्द करने तक की प्रक्रिया शामिल हो सकती है।

शिक्षा व्यवस्था में बढ़ेगा विश्वास

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से न केवल आर्थिक शोषण रुकेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास भी बढ़ेगा। समान पाठ्यक्रम से विद्यार्थियों के बीच असमानता भी कम होगी। राज्य शासन का यह निर्णय निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम है। यदि इसका सख्ती से पालन कराया गया, तो यह न केवल अभिभावकों को राहत देगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण और पारदर्शी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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