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नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में गुणवत्तापूर्ण ग्राम पंचायत विकास योजनाओं और डिजिटल नियोजन उपकरणों पर विशेष ध्यान दिया गया

पंचायत विकास योजनाओं की तैयारी पर पंचायती राज मंत्रालय के आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आज नई दिल्ली में उद्घाटन किया गया। इस उद्घाटन सत्र में पंचायत विकास योजना (2026-27) की तैयारी के लिए जन योजना अभियान (पीपीसी)पुस्तिका, ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी)की गुणवत्ता बढ़ाने पर समिति की रिपोर्टऔर नए रूप में तैयार किए गए ई-ग्रामस्वराज योजना पोर्टल का भी विमोचन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य सहभागी योजना को मजबूत करना और पंचायत विकास योजनाओं की गुणवत्ता में सुधार करना है, ताकि वे अधिक प्रभावी, समावेशी और परिणामोन्मुखी बन सकें। इस कार्यशाला में केंद्रीय मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, पंचायती राज विभागों और एसआईआरडी एवं पीआर के प्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी और देश भर के अन्य प्रमुख हितधारक भी एक साथ शामिल हैं।

पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज ने मुख्य भाषण देते हुए इस बात पर जोर दिया कि ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) का विकास मात्र एक औपचारिकता नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर असल बदलाव लाने वाले गुणवत्तापूर्ण नतीजों पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत विकास योजना के माध्यम से संपत्ति निर्माण की उचित योजना संसाधनों की बर्बादी को रोकने में सहायक होगी। श्री भारद्वाज ने सतत विकास, स्पष्ट संस्थागत उत्तरदायित्वों और संसाधनों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से पंचायत-आधारित योजना को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने जमीनी स्तर पर दीर्घकालिक सेवा वितरण सुनिश्चित करने में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम सभाओं में नागरिकों की अधिक भागीदारी से निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक समावेशी बनेगी।

जल शक्ति मंत्रालय में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) के सचिव श्री अशोक के. के. मीना ने अपने मुख्य भाषण में कहा कि जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) ने देश भर में बड़े पैमाने पर अवसंरचना निर्माण को संभव बनाया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब इन संसाधनों के सतत संचालन, रखरखाव और प्रभावी उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, जिसमें ग्राम पंचायतें स्थानीय आवश्यकताओं की गहरी समझ के कारण सेवा वितरण में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि बेहतर बुनियादी सेवाओं के लिए मजबूत स्थानीय नियोजन महत्वपूर्ण है। उन्होंने संसाधन उपयोग, संसाधन रखरखाव और डिजिटल पारदर्शिता को एकीकृत करते हुए ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) को गतिशील और परिणामोन्मुखी बनाने का आह्वान किया। उन्होंने जवाबदेही में सुधार के लिए विभागों के बीच समन्वय और डिजिटल उपकरणों के उपयोग के महत्व पर बल दिया। श्री मीना ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी सेवा वितरण सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायतों और ग्राम स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समितियों की भूमिका को मजबूत करने, राजस्व के अपने स्रोतों को जुटाने और स्थानीय नियोजन (जीपीडीपी) में संचालन एवं रखरखाव को शामिल करने की जरूरत पर भी बल दिया।

पंचायती राज मंत्रालय में अपर सचिव श्री सुशील कुमार लोहानी ने अपने संबोधन में ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) के बदलते स्वरूप और विषयगत तथा गुणवत्ता-केंद्रित योजना की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि फंड की उपलब्धता के बावजूद, गतिविधियों का दोहराव और केंद्र एवं राज्य की योजनाओं के बीच कमजोर समन्वय अक्सर कम अनुकूल परिणामों की ओर ले जाता है। उन्होंने 16वें वित्त आयोग के तहत ग्रामीण स्थानीय निकायों को आवंटित राशि में 84 प्रतिशत की वृद्धि की ओर ध्यान दिलाया और इस बात पर जोर दिया कि केंद्रीय अनुदान पूरक हैं, यह राज्य वित्त आयोग के अनुदान और ग्रामीण स्थानीय निकायों के स्वयं के राजस्व का विकल्प नहीं है। उन्होंने जीपीडीपी को विकेंद्रीकृत योजना का एक शक्तिशाली साधन बताया और जोर देते हुए कहा कि कि अब गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जो जीपीडीपी की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए गठित समिति द्वारा विकसित 15 संकेतकों से निर्देशित होगा। उन्होंने जीपीडीपी प्रशिक्षण पर नए सिरे से जोर देने का आह्वान किया।

पंचायती राज संयुक्त सचिव सुश्री मुक्ता शेखर ने 16वें वित्त आयोग के अनुदान ढांचे का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया और पंचायती राज संस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए इसके सुधार-उन्मुख दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-31 के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों को 4.35 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, और स्थानीय प्राथमिकताओं पूरा करने में मदद के लिए फंड को पंचायत विकास योजनाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने राज्यों के लिए प्रमुख कार्य बिंदुओं की रूपरेखा भी प्रस्तुत की, जिनमें ई-ग्रामस्वराज और ऑडिटऑनलाइन में शामिल होना, राज्य वित्त आयोगों को सुदृढ़ करना, समर्थ प्लेटफॉर्म को एकीकृत करना और पारदर्शिता, जवाबदेही तथा प्रभावी जमीनी स्तर के शासन को सुनिश्चित करने के लिए ओएसआर रिपोर्टिंग में सुधार करना शामिल है।

इस कार्यशाला के आज पहले दिन तकनीकी सत्र आयोजित किया गया जिसमें विषयगत और उच्च गुणवत्ता वाले पीडीपी तैयार करने के रणनीतिक दृष्टिकोण, 16वें वित्त आयोग के अप्रतिबंधित अनुदानों और उनकी शर्तों को समझना, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्राम गरीबी उन्मूलन योजना (वीपीआरपी) और ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) का समन्वय, पीईएसए जीपीडीपी की तैयारी, नए ई-ग्रामस्वराज पोर्टल और ग्राम मानचित्र पर व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल थे। दूसरे दिन कार्यशाला में पंचायत उन्नति सूचकांक (पीएआई) को साक्ष्य-आधारित योजना में एकीकृत करने पर प्रस्तुतियां होंगी, जिसके बाद राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की टीमें नए पोर्टल पर ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) तैयार करने के अपने अनुभव साझा करेंगी।

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