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न्यायधानी सहित छत्तीसगढ़ में बढ़ती भिक्षावृत्ति

बिलासपुर। न्यायधानी सहित छत्तीसगढ़ में लगातार भिखारियों की संख्या बढ़ने लगी है। आंकड़ों में पिछले कई सालों में भिखारियों की संख्या दोगुनी हो गई है। शहर हो या गांव सभी जगह भिखारी नजर आने लगे हैं। खासकर बड़े शहरों में सड़कों पर बने सिंग्नलों पर ये भिखारी भीख मांगते नजर आते हैं। अब सवाल यह उठता है कि ये  तथाकथित भिखारी क्यों इतनी तादाद में दिखाई देने लगे हैं..? आखिर क्यों बढ़ रही है भिक्षावृत्ति..? अब जबकि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से राशन मुफ्त, आवास मुफ्त सहित कई सुविधाओं को आम जनता को फ्री में लाभ दिया जा रहा है है। इसके बावजूद भिक्षावृत्ति लोगों में क्यों बढ़ने लगी है…??

बिलासपुर में दिनों-दिन भिखारियों की बढ़ती संख्या अब आमतौर पर दिखने लगी है। इनका खासकर भीख मांगने का पॉइंट रहता है चौक चौराहों और रेड सिग्नलों पर जहां पर गाड़ियां खड़ी होते ही यह धावा बोल देते हैं और सुनियोजित ढंग से सभी के पास जबरदस्ती भीख मांगना शुरू कर देते हैं। कभी-कभी  तो  ये लोग बिना वजह की चीज देने का प्रयास भी करते हैं, और उसके बदले में पैसे मांगते है। अब तो इन लोगों ने जगह-जगह डेरा जमाना शुरू कर दिया है। इन भिखारियों में बच्चों और महिलाओं की संख्या अधिक होती है, जो राहगीरों से भीख मांगते हैं। ये बच्चे, महिलाएं जबरदस्ती लोगों को रोककर उनसे पैसे मांगते हैं। इनका पहनावा ओढ़ावा और काया देखकर ही समझ में आ जाता है कि यह आम छत्तीसगढ़ी नहीं बल्कि बाहरी राज्यों से आए प्रवासी हैं। ये सुबह से ही बस अड्डा, मुख्य बाजार शहर के सभी रेड सिग्नल और गुरुद्वारा चौक, सीएमडी चौक, बस स्टैंड चौक, शास्त्री मार्केट चौक, देवकीनंदन चौक, सरकंडा चौक, नूतन चौक, सीपत चौक, नेहरू चौक,राजीव चौक, महाराणा प्रताप चौक, गांधी चौक, पर भीख मांगना शुरू कर देते हैं। ये लोग भगवान के नाम और खाना खाने की दुहाई देकर लोगों के आगे हाथ जोड़ कर खड़े हो जाते हैं। यही नहीं कई बार तो लोगों के कपड़े तक पकड़ लेते हैं और तब तक नहीं छोड़ते, जब तक उन्हें पैसे न दिए जाएं। शहर के विभिन्न मंदिरों के बाहर भी भिखारियों की फौज अक्सर देखी जाती है। जो श्रद्धालुओं के मंदिर से निकलते ही उनके पीछे पड़ जाते हैं। इन भिखारियों में महिलाएं जो कि अपने छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर आंसू बहाकर भीख मांगती हैं।हालांकि कुछ भिखारी ऐसे हैं, जो शरीर से अक्षम हैं और चलने-फिरने में भी असमर्थ हैं। लेकिन कई ऐसे प्रवासी हैं, जो कोई कामकाज करने के बजाए सड़कों पर भीख मांगते हैं और अपने बच्चों से भी भीख मंगवाते हैं।अब तो भिखारियों के कारण लोगों का सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया है।

इन भिक्षावृत्ति करने वाले लोगों के वेश में उठाईगीर और चोर भी शहर में घूम रहे हैं. वो ऐसे मौकों का फायदा उठाकर चोरी और लूट जैसी घटनाओं को अंजाम भी दे रहे हैं, जिससे आम शहरी को नुकसान तो होता ही है।पुलिस के लिए भी यह सिरदर्द बनता जा रहा है। पुलिस भी ऐसे लोगों को पकड़ नहीं पा रही है।कई बार ये मौकों का फायदा उठाकर चोरी की घटनाओं को अंजाम देते है और कोई पहचान नहीं होने से ऐसे लोगों का पकड़ में आना भी मुश्किल हो रहा है।

इसका शायद एक और महत्वपूर्ण कारण है वो ये कि यहां लोगो में उदारता है। यही वजह है कि उदारता से लोग गरीब, बेसहारा लोगों को भीख के तौर पर पैसे या अन्य वस्तु देते हैं।पहले काम के बदले अनाज दिया जाता था, लेकिन अब लोगों को सरकार फ्री में चावल, वृद्धावस्था पेंशन और अन्य सामान दे रहे हैं, इसलिए लोगों को फ्री लेने की आदत हो गई है और लोग अकर्मण्य बनते जा रहे हैं। जनता शासन के योजनाओं पर निर्भर होती जा रही है। व्यक्ति या नौजवान अपराध में लिप्त होते जा रहा है। वह अपराध कर रहा है. छोटे-छोटे बच्चे मां-बाप के साथ निकल रहे हैं। बच्चे भीख मांगते हैं। भिखारियों से पूछने पर वह कहते हैं कि जब हमें खाने में फ्री मिल रहा है तो काम क्यों करें। उनका कहना कि हमारा पेशा ही भिक्षा मांगना है, ऐसे लोगों की सोच बदलने की जरूरत है। तभी उन्नत भारत का निर्माण होगा। शासन सचेत हो जाए, भारत भिक्षावृत्ति से मुक्त हो ऐसा कार्य करना चाहिए, तभी एक स्वस्थ्य भारत एक अच्छा भा का निर्माण होगा।

सड़कों पर जो हाथ फैले हैं, वो केवल भूख नहीं है,
बचपन जहाँ नीलाम हो रहा, वो कोई सुख नहीं है।
तोड़ो इन बेड़ियों को, जो मासूमों को जकड़े हैं,
ये संगठित पाप के पंजे, बहुत गहरे और तगड़े हैं।।

सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"
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