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डुंडीगल में गूंजा वायु शक्ति का गौरव, 231 फ्लाइट कैडेट भारतीय वायु सेना में हुए शामिल

हैदराबाद: डुंडीगल स्थित वायु सेना अकादमी (एएफए) में शनिवार को आयोजित 217वें कोर्स की संयुक्त दीक्षांत परेड भारतीय वायु सेना की परंपरा, अनुशासन और आधुनिक सैन्य क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन बन गई। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी की महिला कैडेटों के पहले बैच सहित कुल 231 फ्लाइट कैडेटों ने भारतीय वायु सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया। इनमें 194 पुरुष और 37 महिला कैडेट शामिल रहीं।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने परेड का निरीक्षण करते हुए सफल कैडेटों को ‘राष्ट्रपति कमीशन’ प्रदान किया। इस अवसर पर भारतीय नौसेना के नौ अधिकारियों, भारतीय तटरक्षक बल के तीन अधिकारियों तथा वियतनाम के दो अधिकारियों को ‘विंग्स’ प्रदान किए गए, जबकि नौवहन प्रशिक्षण पूरा करने वाले तीन अधिकारियों को ‘ब्रेवेट’ से सम्मानित किया गया।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय वायु सेना केवल एक सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा की ढाल और आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक प्रहार करने वाली तलवार भी है। उन्होंने 1947-48 के कश्मीर युद्ध से लेकर 1971 के युद्ध और हालिया ऑपरेशन सिंदूर तक भारतीय वायु सेना की निर्णायक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय वायु सेना ने हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में अपनी क्षमता, साहस और पेशेवर दक्षता सिद्ध की है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों और सैनिकों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ड्रोन, उपग्रह, रडार, सेंसर, साइबर तकनीक और रोबोटिक्स जैसे अत्याधुनिक साधन युद्ध की दिशा तय कर रहे हैं। उन्होंने नव-नियुक्त अधिकारियों से भविष्य की युद्ध प्रणालियों और रणनीतियों को समझने तथा बदलती परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को निरंतर तैयार रखने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सैन्य नेतृत्व को केवल शारीरिक साहस से नहीं, बल्कि तकनीकी दक्षता, त्वरित निर्णय क्षमता और नवाचार से भी परिभाषित किया जाएगा। रक्षा मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि उनके कंधों पर लगे ‘पंख’ केवल सम्मान का प्रतीक नहीं, बल्कि देशवासियों के विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक हैं।

महिला अधिकारियों की बढ़ती भागीदारी पर विशेष टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि नारी शक्ति की मजबूत उपस्थिति भारतीय वायु सेना को और अधिक संतुलित, आधुनिक और सशक्त बनाएगी। उन्होंने इसे समावेशी सैन्य व्यवस्था की सकारात्मक पहचान बताया।

परेड के दौरान वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के नेतृत्व में भव्य फ्लाईपास्ट का आयोजन किया गया, जिसमें पिलाटस पीसी-7 एमके II, हॉक, किरण और चेतक जैसे प्रशिक्षण विमानों ने शानदार प्रदर्शन किया। इसके अलावा आकाश गंगा टीम, महिला वायु योद्धा ड्रिल टीम ‘शक्ति’, सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम, सारंग हेलीकॉप्टर टीम और सु-30 एमकेआई के एरोबेटिक प्रदर्शन ने समारोह को रोमांचक और आकर्षक बना दिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को सम्मानित भी किया गया। फ्लाइंग ऑफिसर आशीष कुमार यादव को पायलट कोर्स में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति पट्टिका’ और ‘नवानगर सम्मान तलवार’ से सम्मानित किया गया। फ्लाइंग ऑफिसर एकता गुप्ता को नौवहन क्षेत्र में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर ‘राष्ट्रपति पट्टिका’ प्रदान की गई, जबकि ग्राउंड ड्यूटी शाखा में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए फ्लाइंग ऑफिसर दिव्यांशी सिंह को सम्मानित किया गया।

दीक्षांत समारोह में उपस्थित परिजनों और परिवारों के लिए यह अवसर गर्व और भावनाओं से भरा रहा। राष्ट्रपति कमीशन प्राप्त करने के साथ ही इन युवा अधिकारियों ने देश की संप्रभुता, सुरक्षा और सम्मान की रक्षा का संकल्प लिया। युद्ध संगीत की गूंज के बीच परेड का समापन नवनियुक्त अधिकारियों के मार्च आउट के साथ हुआ, जहां उन्हें उनके कनिष्ठ अधिकारियों द्वारा पहली सलामी दी गई।

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