राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स, पूसा में “क्वालिटी डेटा जेनरेशन एंड डिसेमिनेशन फॉर एफिशिएंट प्रोजेक्ट प्लानिंग एंड इम्प्लीमेंटेशन इन रेनफेड एरियाज़ ऑफ इंडिया: एड्रेसिंग चैलेंजेज़ टु रिमूव बॉटलनेक्स” (भारत के वर्षा सिंचित क्षेत्रों में प्रभावी परियोजना नियोजन एवं कार्यान्वयन के लिए गुणवत्तापूर्ण आँकड़ों का सृजन एवं प्रसार : बाधाओं को दूर करने हेतु चुनौतियों का समाधान) विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन किया। इस परामर्श का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान संस्थानों को अपनी विशेषज्ञता तथा सूचना-साझाकरण क्षमता प्रदर्शित करने के लिए एक मंच उपलब्ध कराना तथा राज्यों के संबंधित विभागों को अपनी आँकड़ा संबंधी आवश्यकताओं और देश के वर्षा सिंचित क्षेत्रों के समावेशी विकास एवं प्रगति के लिए प्रभावी परियोजना नियोजन एवं कार्यान्वयन हेतु गुणवत्तापूर्ण आँकड़े प्राप्त करने में आँकड़ा उपयोगकर्ताओं के समक्ष आने वाली चुनौतियों को व्यक्त करने का अवसर प्रदान करना था। किसी भी परियोजना के प्रभावी नियोजन के लिए गुणवत्तापूर्ण आँकड़ों की उपलब्धता एक बुनियादी आवश्यकता है। गुणवत्तापूर्ण, विश्वसनीय एवं आसानी से उपलब्ध आँकड़े वर्षा सिंचित क्षेत्रों में विकासात्मक हस्तक्षेपों के प्रभावी नियोजन, कार्यान्वयन, निगरानी तथा मूल्यांकन की आधारशिला हैं। वर्षा, मृदा, भूमि उपयोग, जल संसाधन, फसल प्रदर्शन, सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों, जलवायु संबंधी जोखिमों, जलागम क्षेत्र की विशेषताओं तथा प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित व्यापक आँकड़े नीति-निर्माताओं और कार्यान्वयन एजेंसियों को स्थानीय प्राथमिकताओं की पहचान करने, स्थान-विशिष्ट हस्तक्षेपों की रूपरेखा तैयार करने, संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग को सुनिश्चित करने तथा परियोजनाओं के परिणामों का अधिक सटीक आकलन करने में सक्षम बनाते हैं।

सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर कुमार ने उपयोगकर्ताओं तक गुणवत्तापूर्ण आँकड़ों की सुलभ उपलब्धता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों का जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है, यदि उनसे संबंधित आधारभूत आँकड़े उपलब्ध हों। पूर्ववर्ती योजनाओं के प्रदर्शन संबंधी आँकड़ों के आधार पर वर्तमान योजनाओं की प्रभावशीलता में भी सुधार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मानकीकृत एवं गुणवत्तापूर्ण आँकड़े उपयोगकर्ताओं के लिए आसानी से उपलब्ध होने चाहिए, जिससे कार्यक्रमों को अधिक प्रभावशाली एवं परिणामोन्मुख बनाने के लिए प्रभावी रणनीतियाँ तैयार की जा सकें। डॉ. कुमार ने कहा कि इस परामर्श के माध्यम से राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण जमीनी स्तर पर आँकड़ों की आवश्यकताओं को समझ सकेगा तथा ऐसा मंच उपलब्ध कराएगा, जिससे राज्यों के संबंधित अधिकारी वर्षा सिंचित क्षेत्रों के सतत् विकास के लिए प्रभावी परियोजनाओं की योजना बनाने हेतु आवश्यक आँकड़ों तक पहुँच प्राप्त कर सकें।
परामर्श के दौरान विभिन्न हितधारकों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श एवं सुझाव प्राप्त करने के लिए दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। पहला सत्र आँकड़ों के संकलन तथा उनके भंडारण एवं प्रसार में आने वाली चुनौतियों पर केंद्रित था। इस सत्र में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग योजना ब्यूरो (एनबीएसएसएलयूपी), बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (बीआईएसए–आईएआरआई), अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (आईडब्ल्यूएमआई), महालनोबिस राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र (एमएनसीएफसी) तथा केंद्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (सीआरआईडीए) के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने संस्थानों द्वारा सृजित एवं संधारित आँकड़े प्रस्तुत किए। दूसरा सत्र परियोजना नियोजन के लिए आवश्यक आँकड़ों तथा उपयोगकर्ताओं द्वारा उन्हें प्राप्त करने में आने वाली बाधाओं पर केंद्रित था। इस सत्र में तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, असम, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि राज्यों के प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया तथा आँकड़ों की सुलभ उपलब्धता से संबंधित अपनी चिंताएँ व्यक्त कीं।साभार : पीआईबी