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विमानन क्षेत्र में एनओसी प्रक्रिया होगी आसान और तेज, 15 दिनों में सुधारों पर कार्रवाई के निर्देश

देश में विमानन क्षेत्र से जुड़ी भवन निर्माण और विकास परियोजनाओं के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने पहल तेज कर दी है। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने बुधवार को नागर विमानन मंत्रालय और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर एनओसी प्रक्रिया में सुधारों की व्यापक समीक्षा की।

बैठक का मुख्य फोकस एनओसी जारी करने की मौजूदा व्यवस्था को सरल, पारदर्शी, स्वचालित और समयबद्ध बनाने पर रहा। मंत्री ने अधिकारियों से ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया, जिसमें अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप कम से कम हो और आवेदकों को प्रक्रिया के प्रत्येक चरण की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

प्रस्तावित बदलावों का लाभ आम नागरिकों के साथ-साथ आवासीय एवं व्यावसायिक परियोजनाओं से जुड़े बिल्डरों, समितियों और उद्योग जगत को मिलने की उम्मीद है। हालांकि, मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रक्रिया को सरल बनाने के दौरान विमानन सुरक्षा से जुड़े नियामकीय मानकों में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।

निर्माण से पहले मिले भवन की अनुमत ऊंचाई की जानकारी

बैठक में भवन निर्माण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण समस्या पर भी चर्चा हुई। विशेष रूप से दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद जैसे बड़े महानगरों में प्रस्तावित भवन की अनुमत ऊंचाई की जानकारी आवेदकों को परियोजना के शुरुआती चरण में ही उपलब्ध कराने की संभावना पर विचार किया गया।

इस व्यवस्था से लोगों और निर्माण कंपनियों को जमीन अथवा परियोजना पर अंतिम निर्णय लेने से पहले यह जानकारी मिल सकेगी कि संबंधित स्थान पर कितनी ऊंचाई तक निर्माण की अनुमति है। इससे बाद के चरण में ऊंचाई संबंधी प्रतिबंधों के कारण परियोजना में बदलाव या देरी की स्थिति को कम किया जा सकता है।

सरकार का मानना है कि यदि निर्धारित ऊंचाई से संबंधित जानकारी पहले ही आसानी से उपलब्ध हो जाए तो भवन निर्माण की योजना अधिक व्यावहारिक तरीके से बनाई जा सकेगी और एनओसी प्रक्रिया में लगने वाला समय भी घटेगा।

वैमानिकी अध्ययन की प्रक्रिया को भी सरल बनाने की तैयारी

बैठक में वैमानिकी अध्ययन से संबंधित मौजूदा प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों के साथ चर्चा में अनुमोदन प्रक्रिया को तेज करने तथा आवेदकों पर अनावश्यक प्रक्रियागत बोझ कम करने के विकल्पों पर विचार किया गया।

प्रारंभिक चरण में स्थल के भौतिक सत्यापन की आवश्यकता को कम करने की संभावना भी बैठक में उठाई गई। इसके साथ ही भवन विकास योजनाओं और अन्य दस्तावेजों को जमा करने की मौजूदा अनिवार्यताओं को युक्तिसंगत बनाने पर भी चर्चा हुई।

इसका उद्देश्य ऐसी डिजिटल और डेटा आधारित व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें उपलब्ध तकनीकी जानकारी के आधार पर अधिकतर मामलों का परीक्षण तेजी से किया जा सके और केवल आवश्यक मामलों में ही अतिरिक्त सत्यापन की जरूरत पड़े।

एनओसीएएस के दायरे और स्थानीय निकायों की भूमिका पर विचार

बैठक में अनापत्ति प्रमाण पत्र आवेदन प्रणाली (एनओसीएएस) के मौजूदा भौगोलिक दायरे की भी समीक्षा की गई। वर्तमान व्यवस्था के तहत विजुअल फ्लाइट रूल्स (वीएफआर) संचालन के लिए 20 किलोमीटर और इंस्ट्रुमेंटल फ्लाइट रूल्स (आईएफआर) संचालन के लिए 56 किलोमीटर के दायरे में एनओसी प्रक्रिया लागू होती है।

सरकार अब यह भी देख रही है कि जहां संभव हो, वहां शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के स्तर पर एनओसी जारी करने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है या नहीं। ऐसा होने पर नागरिकों और उद्योगों को प्रत्येक मामले में सीधे एएआई के पास जाने की आवश्यकता कम हो सकती है।

विकेंद्रीकृत व्यवस्था से स्थानीय स्तर पर आवेदन प्रक्रिया अधिक सुगम होने और प्रशासनिक समय बचने की संभावना है। हालांकि, इसके लिए तकनीकी मानकों, सुरक्षा आवश्यकताओं और संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय को स्पष्ट रूप से निर्धारित करना होगा।

15 दिनों में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश

केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एनओसी प्रक्रिया को सरल, स्वचालित और विकेंद्रीकृत बनाने के लिए प्रस्तावित उपायों की व्यवहार्यता की जांच कर आवश्यक कार्रवाई शुरू की जाए। इसके लिए 15 दिनों की समय सीमा निर्धारित की गई है।

मंत्री ने जोर दिया कि सुधारों का उद्देश्य केवल प्रक्रिया को तेज करना नहीं, बल्कि उसे अधिक पूर्वानुमानित और पारदर्शी बनाना भी है। प्रस्तावित व्यवस्था में संबंधित डेटा और भवन की अनुमत ऊंचाई से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।

निवेश और परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाने की उम्मीद

एनओसी प्रक्रिया में सुधार को सरकार की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की व्यापक नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। भवन निर्माण, हवाई अड्डों के आसपास विकास और अन्य महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं में मंजूरी की प्रक्रिया जितनी स्पष्ट और समयबद्ध होगी, परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन उतना ही आसान होगा।

सरकार के अनुसार, सरल और पारदर्शी एनओसी व्यवस्था से निवेश संबंधी निर्णयों में अनिश्चितता कम हो सकती है। इससे निर्माण गतिविधियों को गति मिलने के साथ रोजगार सृजन, आर्थिक गतिविधियों और व्यापक स्तर पर आर्थिक विकास को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, प्रस्तावित सुधारों की सबसे महत्वपूर्ण शर्त विमानन सुरक्षा है। मंत्रालय का रुख स्पष्ट है कि प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसी संतुलन के आधार पर नई एनओसी व्यवस्था को अधिक तेज, तकनीक आधारित और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

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