पर्यटकों ने अपनी आंखों से देखा क्रोकोडाइल पार्क का हैरतअंगेज नजारा
कोटमीसोनार स्थित क्रोकोडाइल पार्क में मगरमच्छों और उनके देखभालकर्ता सीताराम दास ‘बाबा जी’ के बीच वर्षों से कायम अनोखा रिश्ता पर्यटकों के लिए आज भी कौतूहल और आश्चर्य का विषय बना हुआ है। दूर-दूर से आने वाले लोग स्वयं इस दृश्य को देखकर हैरान रह जाते हैं कि बाबा जी की आवाज सुनते ही विशाल जलाशय के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद मगरमच्छ धीरे-धीरे उनकी ओर बढ़ने लगते हैं।
“अपनी आंखों से देखा है यह अद्भुत नजारा”
समीपस्थ ग्राम गतौरा निवासी पर्यटक प्रकाश तिवारी ने बताया कि उन्होंने बाबा जी को स्वयं मगरमच्छों को बुलाते हुए देखा है। उनके अनुसार बाबा जी केवल “आओ…आओ…” कहकर आवाज लगाते हैं और तालाब में जहां कहीं भी मौजूद मगरमच्छ धीरे-धीरे उनकी ओर आने लगते हैं। प्रकाश तिवारी कहते हैं कि यह दृश्य वास्तव में देखने योग्य है। मगरमच्छों और बाबा जी के बीच वर्षों से बने इस आत्मीय संबंध को देखकर सहज ही विश्वास नहीं होता कि वन्यजीव और इंसान के बीच इतनी गहरी समझ और पहचान भी हो सकती है।
“हमने भी आवाज लगाई, मगर कोई नहीं आया”
एक अन्य पर्यटक राम अवतार ने बताया कि उन्होंने भी बाबा जी को मगरमच्छों को बुलाते हुए देखा। विशाल तालाब के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद मगरमच्छ करीब 10 से 15 मिनट के भीतर धीरे-धीरे बाबा जी के समीप पहुंचने लगे। उन्होंने कहा कि इस दृश्य को देखने के बाद उत्सुकतावश उन्होंने भी मगरमच्छों को आवाज देकर बुलाने का प्रयास किया, लेकिन किसी मगरमच्छ ने उनकी आवाज पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। राम अवतार के अनुसार, “यह आश्चर्य की बात है कि बाबा जी की आवाज को मगरमच्छ न केवल सुनते हैं, बल्कि शायद पहचानते और समझते भी हैं।”

पर्यटकों के लिए सबसे अधिक भावुक करने वाला तथ्य तब सामने आता है, जब उन्हें पता चलता है कि सीताराम दास का एक हाथ वर्षों पहले इन्हीं मगरमच्छों के हमले में चला गया था। इसके बावजूद उनके मन में मगरमच्छों के प्रति न तो भय है और न ही किसी प्रकार का द्वेष।
राम अवतार कहते हैं कि एक हाथ गंवाने के बाद भी इन जीवों के प्रति बाबा जी का प्रेम और समर्पण देखकर उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव और बढ़ जाता है। कोटमीसोनार के क्रोकोडाइल पार्क में सीताराम दास और मगरमच्छों के बीच बना यह अनोखा संबंध केवल एक आश्चर्यजनक घटना नहीं, बल्कि मनुष्य और प्रकृति के बीच प्रेम, विश्वास और सह-अस्तित्व का जीवंत उदाहरण भी है। यह संदेश देता है कि प्रकृति और वन्यजीवों के साथ संवेदनशीलता तथा सामंजस्य का रिश्ता स्थापित करना मानव जीवन और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए आवश्यक है।

वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, एवीके न्यूज सर्विस