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VYOMA इनोवेशन चैलेंज का समापन, भारत-केंद्रित ओपन-सोर्स एआई समाधानों का प्रदर्शन

नई दिल्ली: भारत में स्थानीय जरूरतों और जनहित से जुड़े क्षेत्रों के लिए ओपन-सोर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समाधानों को विकसित करने की दिशा में VYOMA इनोवेशन चैलेंज का फाइनल आयोजित किया गया। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (DIC) के अंतर्गत डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन (DIBD) ने Current AI और Kalpa Impact के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन आईआईआईटी-दिल्ली में किया।

VYOMA इनोवेशन चैलेंज में शोधकर्ताओं, छात्रों और स्टार्टअप्स को भारत की अलग-अलग परिस्थितियों के अनुरूप ओपन-सोर्स एआई हार्डवेयर के व्यावहारिक उपयोग विकसित करने के लिए आमंत्रित किया गया था। प्रतिभागियों को ‘सुनो सूत्र’ नामक ओपन-सोर्स, बहुभाषीय हैंडहेल्ड एआई रेफरेंस डिजाइन पर काम करने और यह तलाशने का अवसर दिया गया कि एआई हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर को जनहित तथा स्थानीय स्तर पर उपयोग के लिए किस तरह अनुकूलित किया जा सकता है।

चैलेंज के फाइनल में 10 फाइनलिस्ट टीमों ने अपने कार्यशील प्रोटोटाइप प्रस्तुत किए। इन प्रोटोटाइप में स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच, कानूनी सेवाओं और विभिन्न सुविधाओं तक पहुंच जैसे क्षेत्रों पर आधारित समाधान शामिल रहे। टीमों ने अपने उत्पादों और तकनीकी अवधारणाओं के माध्यम से यह प्रदर्शित किया कि स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित एआई तकनीक वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में किस प्रकार उपयोगी हो सकती है।

फाइनल के दौरान जूरी ने प्रतिभागी टीमों के प्रोटोटाइप का मूल्यांकन किया और उनसे तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं पर सवाल-जवाब किए। टीमों को उनके समाधानों की उपयोगिता, तकनीकी क्षमता और वास्तविक परिस्थितियों में संभावित अनुप्रयोगों से संबंधित प्रतिक्रिया भी दी गई।

VYOMA चैलेंज ने ओपन-सोर्स एआई हार्डवेयर, बहुभाषीय एआई और एज एआई से जुड़े विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों के प्रतिभागियों को एक साझा मंच प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान हार्डवेयर ऑप्टिमाइजेशन, मॉडल क्वांटाइजेशन, मॉडल की एक्यूरेसी और प्रोटोटाइप को वास्तविक दुनिया में लागू करने की चुनौतियों पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा हुई।

उद्घाटन एवं समापन कार्यक्रम से जुड़े संबोधन में मंत्रालय की वैज्ञानिक ‘जी’ कविता भाटिया ने भारत की स्थानीय जरूरतों के अनुरूप एआई समाधान विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक की उपयोगिता का आकलन केवल प्रयोगशाला या पायलट स्तर पर उसके प्रदर्शन से नहीं, बल्कि नागरिकों के दैनिक जीवन में उसके वास्तविक प्रभाव से किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि VYOMA के माध्यम से ओपन-सोर्स हार्डवेयर और भाषिनी की भाषा क्षमताओं को एक साथ लाने का प्रयास किया गया है। उनके अनुसार, स्थानीय स्तर पर और ऑफलाइन काम करने वाले समाधान बैंडविड्थ पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ कुछ उपयोग परिस्थितियों में डेटा की निजता से जुड़े लाभ भी प्रदान कर सकते हैं।

मंत्रालय के वैज्ञानिक ‘ई’ तरुण पांडे ने VYOMA जैसे हैकाथॉन और नवाचार कार्यक्रमों को युवा शोधकर्ताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और नवप्रवर्तकों के बीच सहयोग का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच नई तकनीकों को जनकल्याण से जुड़े व्यावहारिक उपयोगों में बदलने के अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने भाषिनी के माध्यम से समावेशी भाषा तकनीक और देश की एआई क्षमताओं को विकसित करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन के सीईओ अमिताभ नाग ने कहा कि केवल भाषा की बाधा दूर करना ही डिजिटल समावेशन के लिए पर्याप्त नहीं है, बल्कि अंतिम छोर तक तकनीक की पहुंच भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि VYOMA की अवधारणा ओपन और ऑफलाइन हार्डवेयर की आवश्यकता से जुड़ी है, ताकि विविध तथा सीमित कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में भी एआई आधारित समाधान उपयोग किए जा सकें।

उन्होंने कहा कि चैलेंज में भाग लेने वाली टीमों के प्रोटोटाइप से यह सामने आया कि ओपन हार्डवेयर को वास्तविक दुनिया की जरूरतों के अनुरूप उपयोगी समाधानों में बदला जा सकता है। अब इन समाधानों को उपयोगकर्ता प्रतिक्रिया, सहयोग और निरंतर परीक्षण के माध्यम से आगे विकसित करने पर ध्यान दिया जाना है।

फाइनल कार्यक्रम में ‘सुनो सूत्र’ के रेफरेंस डिजाइन का प्रदर्शन भी किया गया। इसके साथ VYOMA इनोवेशन चैलेंज की विकास यात्रा, प्रतिभागी टीमों द्वारा विकसित नए उपयोग मामलों तथा ओपन-सोर्स एआई हार्डवेयर और एम्बेडेड एआई इकोसिस्टम की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

चैलेंज में चार नवाचारों को विजेता के रूप में चुना गया। जूरी के चयन के आधार पर सम्मानित चार टीमों में टीम आशा सहायक, टीम श्रवण, टीम संग्रह–अपना साथी और टीम सहायक मित्र–A.V.E.R.A. (Autonomous Voice-Enabled Edge Rural Advisor) शामिल हैं। विजेता टीमों को उनके नवाचार तथा जनहित में संभावित उपयोग के आधार पर पुरस्कार राशि प्रदान की गई।

VYOMA इनोवेशन चैलेंज ‘सुनो सूत्र’ के उस तकनीकी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता है, जिसे फरवरी 2026 में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में प्रस्तुत किया गया था। इसका उद्देश्य ओपन-सोर्स, बहुभाषीय और मानव-केंद्रित एआई हार्डवेयर के विकास को प्रोत्साहित करना है। रेफरेंस डिजाइन को नए डेवलपर्स तक पहुंचाकर चैलेंज के माध्यम से विभिन्न परिस्थितियों और उपयोग मामलों के अनुरूप इसके प्रयोग एवं अनुकूलन को बढ़ावा दिया गया।

इस पहल का एक व्यापक उद्देश्य ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर के लिए ऐसा इकोसिस्टम विकसित करना है, जिसमें बहुभाषीय और एज एआई समाधानों को भारत की अलग-अलग भाषाई, तकनीकी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया जा सके। कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में ऑफलाइन या एज-आधारित एआई के उपयोग की संभावनाएं इस दिशा में विशेष महत्व रखती हैं।

कार्यक्रम ने शोधकर्ताओं, नवप्रवर्तकों, छात्रों, स्टार्टअप्स, सरकारी हितधारकों और तकनीकी इकोसिस्टम से जुड़े भागीदारों को एक मंच पर लाकर व्यावहारिक एआई समाधानों के विकास के लिए सहयोग की संभावनाओं को सामने रखा। फाइनल में प्रस्तुत प्रोटोटाइप यह भी दर्शाते हैं कि ओपन-सोर्स हार्डवेयर और बहुभाषीय एआई को स्थानीय जरूरतों के साथ जोड़कर विभिन्न सार्वजनिक उपयोग के क्षेत्रों में नए प्रयोग किए जा सकते हैं।

डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन

डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन एआई आधारित बहुभाषीय डिजिटल समावेशन के लिए राष्ट्रीय स्तर का भाषा प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम विकसित कर रहा है।

भाषिनी वर्तमान में 36 भारतीय टेक्स्ट भाषाओं, 23 भारतीय वॉइस भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को समर्थन प्रदान करता है। इसके माध्यम से 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को भाषा तकनीक संबंधी सहायता मिल रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भाषिनी प्लेटफॉर्म पर 9 बिलियन से अधिक एआई इन्फेरेंस किए जा चुके हैं और प्रतिदिन 24 मिलियन से अधिक एआई इन्फेरेंस प्रोसेस किए जाते हैं।

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