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सामाजिक न्याय एवं समानता के पुरोधा पुरुष थे डॉ. अंबेडकर

आधुनिक भारत के निर्माण की जब भी चर्चा होती है, तो डॉ. भीमराव अंबेडकर का व्यक्तित्व…

किशोर आक्रामकता एवं हिंसा पर अंकुश लगाने की पहल हो

भारतीय किशोरों में बढ़ रही हिंसक प्रवृत्ति एवं क्रूर मानसिकता चिन्ताजनक है, नये भारत एवं विकसित…

युद्ध के माहौल में विश्व शांति का शंखनाद है विश्व णमोकार दिवस

विश्व इतिहास के इस संक्रमणकाल में, जब मानवता युद्ध, हिंसा, आतंक, तनाव और असहिष्णुता के बोझ…

कोरियन ड्रामा से भारतीय सीरियल तक : मनोरंजन की दिशा पर पुनर्विचार

विश्व के मनोरंजन जगत में पिछले कुछ वर्षों में यदि किसी देश ने टेलीविजन और वेब…

दंड से सुधार की ओर विश्वास आधारित न्यायिक यात्रा

भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि व्यवस्था, अनुशासन, सुधार…

पश्चिम बंगाल बढ़ती अराजकताः लोकतंत्र के लिए चुनौती

पश्चिम बंगाल, जो कभी सांस्कृतिक चेतना, बौद्धिकता और राजनीतिक परिपक्वता का प्रतीक माना जाता था, आज…

विवाह संस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच नई खाई

आधुनिकता के संक्रमणकालीन दौर में सबसे अधिक यदि कोई संस्था प्रश्नों के घेरे में है, तो…

बुजुर्गों के भरण-पोषण के लिये एक सराहनीय पहल

भारतीय संस्कृति में माता-पिता को देवतुल्य माना गया है-“मातृदेवो भव, पितृदेवो भव” केवल शास्त्रों की पंक्ति…

अपने भीतर के हनुमान को जगाने का पर्व

हनुमान जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव जीवन के चरित्र-निर्माण, आत्मबल, संयम, सेवा और…

बीमा सुरक्षा का माध्यम बने, न कि मुनाफे का जाल

बीमा का मूल उद्देश्य जीवन की अनिश्चितताओं से सुरक्षा प्रदान करना है। यह व्यवस्था व्यक्ति को…

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