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साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा का वात्सल्य, साधना और समर्पण प्रेरणा का संगम है

शासनमाता, असाधारण साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी के समाधि स्थल पर निर्मित ‘वात्सल्य पीठ’ का भव्य उद्घाटन समारोह श्रद्धा, गरिमा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर शासनश्री मुनिश्री विमलकुमार, बहुश्रुत मुनिश्री उदितकुमार, डाॅ. मुनिश्री अभिजीतकुमार एवं साध्वी कुंदनरेखा के पावन सान्निध्य ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊँचाइयों से अनुप्राणित किया। कार्यक्रम में भारत सरकार के भारत सरकार के राज्यमंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा मुख्य अतिथि, प्रख्यात उद्योगपति श्रीमती सावित्री जिंदल विशिष्ट अतिथि तथा जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष महेंद्र नाहटा विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती सुमन नाहटा, आचार्य महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री कन्हैयालाल जैन पटावरी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तित्वों ने अपनी उपस्थिति से समारोह की गरिमा बढ़ाई।

केंद्रीय मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि “यह अवसर केवल एक स्मारक के उद्घाटन का नहीं, बल्कि एक दिव्य चेतना के पुनः प्रतिष्ठापन का क्षण है।” उन्होंने साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी को “वात्सल्य, करुणा और संवेदना की साक्षात् प्रतिमूर्ति” बताते हुए कहा कि वात्सल्य पीठ आने वाली पीढ़ियों के लिए एक जीवंत प्रेरणा केंद्र सिद्ध होगा।”

मुनि विमल कुमार जी ने कहा कि “वात्सल्य केवल भावना नहीं, बल्कि साधना की पराकाष्ठा है, जिसे शासन माता ने अपने जीवन में जिया।” मुनि उदितकुमार जी ने कहा कि “उनका जीवन संयम और संतुलन का अद्भुत उदाहरण है, यह स्थल आत्मिक शांति का अनुभव कराएगा।” डाॅ. मुनिश्री अभिजीतकुमार एवं साध्वी कुंदनरेखा ने शासनमाता के प्रति समर्पित अपनी कविता और उद्गार व्यक्त किए। श्रीमती सावित्री जिंदल ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि “वात्सल्य पीठ करुणा, ममता और साधना का जीवंत प्रतीक है।” उन्होंने साध्वीप्रमुखा को नारी शक्ति की प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके जीवन को महिलाओं के लिए मार्गदर्शक बताया।

महासभा अध्यक्ष श्री महेंद्र नाहटा ने कहा कि “यह केवल वात्सल्य पीठ का उद्घाटन नहीं, बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक चेतना एवं उससे जुड़ी स्मृतियों का उत्सव है।” उन्होंने इसे “करुणा और साधना का दिव्य तीर्थ” बताते हुए विश्वास जताया कि यह पीठ आने वाली पीढ़ियों को दिशा प्रदान करेगी। आचार्य महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री कन्हैयालाल जैन पटावरी ने कहा कि “यह वात्सल्य पीठ शासनमाता के जीवन मूल्यों का साकार रूप है, जो समाज को सेवा, संयम और समर्पण की प्रेरणा देगा।” उन्होंने युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण के दिल्ली के प्रति विशेष अनुकंपा का उल्लेख करते हुए कहा कि “यह स्थल साधना और संस्कारों का ऐसा केंद्र बनेगा, जहाँ से नई पीढ़ी जीवन के सही मार्ग को पहचान सकेगी।”

इस अवसर पर जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा दिल्ली के अध्यक्ष श्री सुखराज सेठिया ने साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा के बहुआयामी व्यक्तित्व और उनकी साहित्यिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्हें “तुलसी की अनुपम कृति” बताया। कार्यक्रम में वात्सल्य पीठ के समन्वयक श्री लक्ष्मीपत बोथरा ने निर्माण कार्य की विशेषताओं को रेखांकित किया, जबकि कार्यक्रम का कुशल संचालन महामंत्री श्री प्रमोद घोड़ावत ने किया। युवा गौरव श्री पुखराज सेठिया ने साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को व्यक्त किया।

इस पावन अवसर पर निर्माण कार्य एवं अन्य व्यवस्थाओं में सहभागी रहे समस्त कार्यकर्ताओं को शील्ड एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। विशेष अनुदानदाता श्री विकास मालू की मातोश्री ने भी इस अवसर पर अपने भावपूर्ण उद्गार व्यक्त करते हुए इस पावन कार्य को एक आध्यात्मिक पुण्य बताया। समारोह में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि “वात्सल्य पीठ” केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि करुणा, साधना और आत्मिक उत्थान का जीवंत केंद्र बनेगा। यह स्थल आने वाले समय में श्रद्धा, प्रेरणा और आध्यात्मिक ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण तीर्थ बनकर उभरेगा, ऐसी भावनाएं व्यक्त की।

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