NEW English Version

मानसून सत्र व्यर्थ नहीं, अर्थपूर्ण ढंग से चले

मानसून सत्र दोनों सदनों में सुचारुरूप से चले इसके लिये सर्वदलीय बैठक में सहमति भले ही…

राजनीतिक चंदे की पारदर्शी व्यवस्था बनाना जरूरी

वर्ष 2024 के आम चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं,राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे…

बिखरने की विवशता भोगती विपक्षी एकता

जब-जब विपक्षी दलों की एकता की बात जितनी तीव्रता से हुई, तब-तब वह अधिक बिखरी। विपक्षी…

सफल जीवन के लिये जोश भी चाहिए और होश भी

सफल लोगों को गौर से देखें तो पाएंगे कि वे देर तक किसी बात पर अटकते…

गरीबी उन्मूलन एवं आर्थिक उन्नति के सुखद संकेत

आजादी के अमृत काल में सशक्त भारत एवं विकसित भारत को निर्मित करते हुए गरीबमुक्त भारत…

सुविधा की सड़कों पर जान क्यों इतनी सस्ती है?  

भारत का सड़क यातायात तमाम विकास की उपलब्धियों एवं प्रयत्नों के असुरक्षित एवं जानलेवा बना हुआ…

हिंसक होता राजनीतिक चेहरा लोकतंत्र पर बदनुमा दाग

राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को हिंसक प्रतिस्पर्धा में नहीं बदला जा सकता, लोकतंत्र का यह सबसे महत्वपूर्ण पाठ…

स्वास्थ्य पर बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का जानलेवा हमला

बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खाद्य पदार्थ एवं डिब्बाबन्द उत्पादों के सेहत पर पड़ने वाले घातक प्रभावों पर…

राकांपा की फूट से विपक्षी एकता को झटका

वर्ष 2024 के चुनाव से पूर्व भारतीय राजनीति के अनेक गुणा-भाग और जोड़-तोड़ भरे दृश्य उभरेंगे।…

अखण्ड भारत के स्वप्नद्रष्टा थे डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी

भारतीय राजनीति से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का गहरा नाता हुआ करता था। वे जम्मू कश्मीर…

Translate »