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प्रकृति और मानुष..

प्रकृति ने पंछी को पंख दिए, जल को लहर, गगन को विस्तार। सबने मर्यादा ओढ़ी अपनी,…

“बिलासा” महान वीरांगना और विदुषिका

आज से लगभग 400 साल पहले जब बिलासपुर शहर, शहर नहीं होकर एक छोटा सा गांव…

शिक्षक : केवल ज्ञानदाता नहीं, राष्ट्र के चरित्र-निर्माता

भारत की संस्कृति में शिक्षक का स्थान सदैव अत्यंत ऊँचा रहा है। हमारी परंपरा ने शिक्षक…

राष्ट्रीय सम्मान ‘छत्तीसगढ़ रत्न’ मिलने पर सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ को मिली शुभकामनाएं

न्यायधानी बिलासपुर के वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं समाजसेवी सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ को राष्ट्रीय सम्मान ‘छत्तीसगढ़…

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी : धर्म, कर्म और मानवता के मार्गदर्शक का महापर्व

भारतीय संस्कृति में पर्व और त्योहार केवल धार्मिक आस्था के अवसर नहीं हैं, बल्कि वे हमारी…

हरछठ-हलषष्ठी : मातृत्व, संतान-सुख और लोककृषि संस्कृति का पर्व

भारतीय लोकजीवन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पर्व और त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान…

नेत्रदान – मृत्यु के बाद भी जीवन में उजाला बाँटने का महादान

मानव जीवन में आँखों का महत्व शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। आँखें केवल देखने…

“सुपोषित भारत : स्वस्थ भविष्य और समृद्ध राष्ट्र की आधारशिला”

पहला सुख निरोगी काया"—भारतीय जीवन-दर्शन का यह सूत्र आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना सदियों…

कांवड़ यात्रा : आस्था, अनुशासन और आत्मसंयम का महापर्व

भारत की संस्कृति में तीर्थ यात्राएं केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मसंयम और लोककल्याण की…

आत्मनिर्भर भारत की सशक्त आधारशिला “लघु उद्योग”

"बड़े उद्योग अर्थव्यवस्था को गति देते हैं, लेकिन लघु उद्योग समाज को रोजगार, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता…

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