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डायमंड बुक्स के चेयरमैन नरेन्द्र कुमार वर्मा का निधन, भारतीय प्रकाशक जगत ने खोया दूरदर्शी साहित्य-सेवी

नई दिल्ली । भारतीय प्रकाशक जगत के अग्रणी, डायमंड बुक्स के चेयरमैन श्री नरेन्द्र कुमार वर्मा का 10 जुलाई 2026 को निधन हो गया। उनके निधन से साहित्य, प्रकाशन उद्योग और पुस्तक प्रेमियों के बीच शोक की लहर है। उन्होंने अपने जीवन के सात दशकों से अधिक समय तक भारतीय पठन संस्कृति को समृद्ध बनाने, गुणवत्तापूर्ण साहित्य को जन-जन तक पहुँचाने तथा भारतीय भाषाओं के प्रकाशन को नई दिशा देने में उल्लेखनीय योगदान दिया।

3 नवम्बर 1948 को जन्मे नरेन्द्र कुमार वर्मा ऐसे परिवार से जुड़े थे, जिसका पुस्तक व्यवसाय से कई पीढ़ियों का संबंध रहा। विभाजन के बाद पाकिस्तान के मुल्तान से विस्थापित होकर उनका परिवार दिल्ली पहुँचा और अत्यंत कठिन परिस्थितियों में नए सिरे से जीवन और व्यवसाय की शुरुआत की। सीमित संसाधनों के बावजूद उनके पिता स्वर्गीय गोविन्दराम वर्मा ने “पंजाबी पुस्तक भंडार” की स्थापना कर पुस्तक व्यवसाय को पुनः खड़ा किया। यही संघर्ष और कर्मनिष्ठा नरेन्द्र कुमार वर्मा के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी प्रेरणा बनी।

नरेन्द्र कुमार वर्मा
नरेन्द्र कुमार वर्मा

वर्ष 1979 में उन्होंने अपने पिता और भाई गुलशन वर्मा के साथ मिलकर प्रकाशन के क्षेत्र में नई शुरुआत की। बाल साहित्य, कॉमिक्स, पॉकेट बुक्स और लोकप्रिय साहित्य को केंद्र में रखकर उन्होंने ऐसे प्रकाशन मॉडल का निर्माण किया, जिसने आगे चलकर भारतीय प्रकाशन उद्योग में नई पहचान बनाई। “लम्बू-मोटू”, “चाचा-भतीजा”, “फौलादी सिंह” जैसे लोकप्रिय पात्रों के साथ बच्चों के लिए मनोरंजक और ज्ञानवर्धक साहित्य तैयार किया गया, जिसने लाखों पाठकों का स्नेह प्राप्त किया।

डायमंड पॉकेट बुक्स और डायमंड कॉमिक्स के माध्यम से उन्होंने हिंदी सहित अनेक भारतीय भाषाओं में साहित्य को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाया। प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट प्राण के लोकप्रिय पात्र “चाचा चौधरी” को डायमंड प्रकाशन से जोड़ना उनके प्रकाशन जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। इसके बाद डायमंड कॉमिक्स देशभर के रेलवे बुक स्टॉल, पुस्तक विक्रेताओं और पुस्तक मेलों के माध्यम से घर-घर तक पहुँची।

नरेन्द्र कुमार वर्मा के नेतृत्व में डायमंड बुक्स ने लगभग 11 हजार से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन किया। हिंदी, अंग्रेजी सहित भारत की 12 भाषाओं में प्रकाशित इन पुस्तकों में बाल साहित्य, कथा-साहित्य, व्यक्तित्व विकास, आध्यात्मिक साहित्य, जीवनियाँ, समसामयिक विषयों और लोकप्रिय साहित्य की विस्तृत श्रृंखला शामिल है। उन्हें प्रेमचंद, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, विष्णु प्रभाकर, मन्नू भंडारी, चित्रा मुद्गल, गुलशन नंदा, ओशो, किरण बेदी, चेतन भगत और अनेक प्रतिष्ठित लेखकों की कृतियों के प्रकाशन का अवसर मिला।

वे केवल सफल प्रकाशक ही नहीं, बल्कि पुस्तक संस्कृति के संवाहक भी थे। दिल्ली पुस्तक मेले के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके अतिरिक्त उन्होंने “गृहलक्ष्मी”, “साधना पथ” और “क्रिकेट टुडे” जैसी लोकप्रिय पत्रिकाओं के प्रकाशन के माध्यम से भी पाठकों से मजबूत संबंध स्थापित किया। बदलते समय के साथ उन्होंने ई-बुक्स, ऑनलाइन बिक्री और आधुनिक डिजिटल तकनीकों को अपनाकर प्रकाशन उद्योग को नई दिशा दी।

नरेन्द्र कुमार वर्मा का मानना था कि पुस्तकें केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि समाज निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। वे राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक उत्तरदायित्व के समर्थक थे तथा अपने विचारों और कार्यों के माध्यम से नई पीढ़ी को पढ़ने, सीखने और सकारात्मक सोच अपनाने के लिए प्रेरित करते रहे।

उनके निधन से भारतीय प्रकाशन जगत ने एक दूरदर्शी प्रकाशक, साहित्य-प्रेमी और कर्मयोगी व्यक्तित्व को खो दिया है। उनकी प्रकाशित हजारों पुस्तकें, लेखकों के साथ उनके आत्मीय संबंध और भारतीय पठन संस्कृति को सशक्त बनाने में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा। साहित्य और प्रकाशन जगत उनके योगदान को लंबे समय तक श्रद्धापूर्वक स्मरण करेगा। ए वी के न्यूज़ सर्विस

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