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कौशलयुक्त युवा : विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति

15 जुलाई : विश्व युवा कौशल दिवस पर विशेष

किसी भी राष्ट्र की वास्तविक संपदा उसके प्राकृतिक संसाधन, विशाल भवन, उद्योग या खनिज भंडार नहीं होते, बल्कि उसकी युवा शक्ति होती है। युवा ही राष्ट्र के वर्तमान का उत्साह और भविष्य की संभावनाओं का आधार होते हैं। यदि युवाओं के पास ज्ञान, चरित्र, दृष्टि और कौशल का समन्वय हो तो वे किसी भी देश को विकास के शिखर तक पहुँचा सकते हैं। यही कारण है कि प्रतिवर्ष 15 जुलाई को विश्व युवा कौशल दिवस मनाया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2014 में इस दिवस की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य युवाओं को रोजगारोन्मुखी शिक्षा, तकनीकी दक्षता, उद्यमिता और व्यावसायिक प्रशिक्षण के प्रति प्रेरित करना है। आज के प्रतिस्पर्धी और तकनीक-प्रधान युग में केवल डिग्री प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कौशल विकास सफलता की अनिवार्य शर्त बन गया है।

इक्कीसवीं सदी ज्ञान और तकनीक की सदी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, डिजिटल तकनीक, डेटा विज्ञान, हरित ऊर्जा और आधुनिक उद्योगों ने कार्यक्षेत्र की प्रकृति को पूरी तरह बदल दिया है। ऐसे समय में वही व्यक्ति आगे बढ़ सकता है जो बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को निरंतर विकसित करता रहे।

कौशल केवल मशीन चलाने या कोई तकनीकी कार्य करने की क्षमता नहीं है। संवाद कला, नेतृत्व क्षमता, समस्या समाधान, रचनात्मक चिंतन, समय प्रबंधन, टीम भावना और नवाचार भी कौशल के ही अंग हैं। वास्तव में कौशल वह शक्ति है जो ज्ञान को व्यवहार में बदलती है और व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाती है।

भारत आज विश्व का सबसे युवा देशों में से एक है। देश की बड़ी आबादी कार्यशील आयु वर्ग में है। इसे “जनसांख्यिकीय लाभांश” (Demographic Dividend) कहा जाता है। यह स्थिति किसी भी राष्ट्र के लिए स्वर्णिम अवसर होती है, किंतु यह तभी लाभदायक सिद्ध होती है जब युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उपयुक्त कौशल प्राप्त हो।

यदि युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण नहीं मिलेगा तो यही जनसांख्यिकीय लाभांश भविष्य में बेरोजगारी और सामाजिक चुनौतियों का कारण भी बन सकता है। इसलिए कौशल विकास केवल रोजगार का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास की आधारशिला है। 

लंबे समय तक हमारी शिक्षा प्रणाली परीक्षा और प्रमाणपत्र केंद्रित रही। परिणामस्वरूप अनेक विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी रोजगार के लिए आवश्यक व्यावहारिक दक्षता से वंचित रह जाते हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षा को कौशल आधारित बनाया जाए। नई शिक्षा नीति ने भी अनुभवात्मक शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप तथा उद्यमिता पर विशेष बल दिया है। विद्यालय स्तर से ही विद्यार्थियों में कार्यकुशलता, तकनीकी समझ और नवाचार की भावना विकसित की जानी चाहिए।

कौशल व्यक्ति को केवल नौकरी पाने योग्य नहीं बनाता, बल्कि उसे रोजगार देने वाला भी बना सकता है। एक प्रशिक्षित युवा स्वरोजगार, स्टार्टअप, लघु उद्योग, डिजिटल सेवाओं तथा नवाचार आधारित उद्यमों के माध्यम से न केवल स्वयं आगे बढ़ सकता है, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित कर सकता है।

आज देश में अनेक युवा कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी, हस्तशिल्प, पर्यटन, डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन सेवाओं के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। यह परिवर्तन कौशल की शक्ति का ही परिणाम है।

वर्तमान युग वैश्विक प्रतिस्पर्धा का युग है। आज भारतीय युवा केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विश्व के विभिन्न देशों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, अनुसंधान, अंतरिक्ष विज्ञान, खेल, कला और व्यवसाय के क्षेत्र में भारतीय युवाओं ने अपनी योग्यता का परिचय दिया है।

लेकिन वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए केवल प्रतिभा पर्याप्त नहीं है। तकनीकी दक्षता, भाषा कौशल, डिजिटल साक्षरता और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति भी आवश्यक है। इसलिए युवाओं को जीवनपर्यंत सीखने की संस्कृति अपनानी होगी।

राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों के प्रयासों से नहीं होता। इसके लिए सक्षम, जागरूक और कुशल नागरिकों की आवश्यकता होती है। जब कोई युवा अपने कौशल के माध्यम से समाज की समस्याओं का समाधान खोजता है, नई तकनीक विकसित करता है, रोजगार सृजित करता है या सेवा कार्यों में योगदान देता है, तब वह राष्ट्र निर्माण में सहभागी बन जाता है।

स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा था –  “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।” यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। कौशल, परिश्रम और आत्मविश्वास के माध्यम से ही युवा अपने लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।

डिजिटल युग की नई चुनौतियाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वचालन के बढ़ते प्रभाव से अनेक पारंपरिक रोजगार बदल रहे हैं। ऐसे में युवाओं को नई तकनीकों के अनुरूप स्वयं को तैयार करना होगा। डिजिटल कौशल, साइबर सुरक्षा, डेटा विश्लेषण, मशीन लर्निंग और हरित प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में भविष्य की असीम संभावनाएँ हैं। विश्व युवा कौशल दिवस युवाओं को यही संदेश देता है कि परिवर्तन से डरने के बजाय उसे अवसर के रूप में स्वीकार करें।

विश्व युवा कौशल दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि भविष्य के निर्माण का संकल्प है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि युवा शक्ति तभी सार्थक है जब वह ज्ञान के साथ कौशल से भी संपन्न हो। कौशलयुक्त युवा न केवल अपने जीवन को दिशा देते हैं, बल्कि राष्ट्र के विकास की गति भी निर्धारित करते हैं। आज आवश्यकता है कि प्रत्येक युवा स्वयं को निरंतर सीखने, विकसित करने और समाजोपयोगी बनाने का प्रयास करे। क्योंकि भविष्य उन्हीं का होता है जो अपने हाथों में कौशल और हृदय में संकल्प लेकर आगे बढ़ते हैं।

कौशल से सजते हैं सपने,

परिश्रम से मिलती पहचान।

युवा जगे तो राष्ट्र जागे,

उज्ज्वल हो भारत का अभियान॥

सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"
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