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अब आयुर्वेद से कहे अस्थमा को बाए-बाए

चिकित्सा के विभिन्न पद्धतियों में अस्थमा के प्रभाव को नियंत्रित करने का ही उपचार है जिसके लिए इन्हेलर

विनीता झा
कार्यकारी संपादक

अस्थमा एक लाइलाज बीमारी है, जिसका बचाव ही इसका इलाज़ कहा जाता है,  इसमें रोगी को सांस फूलने या साँस न आने के दौरे बार-बार पड़ते हैं। मानव शरीर कई बाहरी पदार्थों को स्वीकार नहीं करता इन्हे हम एलर्जेन कहते हैं। ये एलर्जेन हमारी श्वास प्रणाली में जो प्रतरोध या एलर्जी पैदा करते है, वह श्वास रोग, दमा या अस्थमा कहा जाता हैं। चिकित्सा के विभिन्न पद्धतियों में अस्थमा के प्रभाव को नियंत्रित करने का ही उपचार है जिसके लिए इन्हेलर का उपयोग किया जाता है। दुनिया भर में अस्थमा से पीडित रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 1970 के बाद से अस्थमा के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। पूरे विश्व में करीब 23 करोड़ 50 लाख लोग अस्थमा से पीडित हैं। भारत में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के करीब 1 करोड़ 30 लाख लोग और 35 से अधिक उम्र के 1 करोड़ 10 लाख लोग इससे पीडित हैं।  3.25 करोड़ लोग भारत में अस्थमा से जूझ रहे हैं। यहां जन्म लेने वाला हर 20 वांनवजात शिशु इस भयंकर बीमारी की चपेट में आ रहा है। हमारे देश में हर वर्ष अस्थमा के रोगियों की संख्या पांच प्रतिशत की दर से बढ़ रही है।

अस्थमा का कारण

अस्थमा कई कारणों से हो सकता है. कुछ पदार्थ हमारे शरीर की इम्यून व्यवस्था का कारण बन अस्थमा एलर्जी को प्रेरित करते हैं। अनेक लोगों में इसमें एलर्जी मौसम, खाने की अलग अलग वास्तु , दवाइयों, धूल-मिटटी, परफ्यूम जैसी खुशबू और कुछ अन्य प्रकार के पदार्थों से हो सकती हैं। एक अनुमान  के अनुसार, जबमाता-पिता दोनों को अस्थमा होता है तो ऐसे में 75 से 100 प्रतिशत बच्चों में भी एलर्जी की संभावनाएं पैदा हो जाती हैं।

इन्हेलर से मिलेगी मुक्ति

बचाव ही अस्थमा का सबसे सरल उपाय है साथ ही आयुर्वेद का उपयोग आपको अस्थमा से बचने में सहायक है, आयुर्वेद में कई सारी ऐसी औषधियां है जो आपको अस्थमा से बचा सकती है साथ ही आपको इन्हेलर से हमेशा के लिए मुक्ति दिल सकती हैं

सर्दिया, अस्थमा रोगियों के लिए चुनौतीपूर्ण. सर्दिया अस्थमा रोगियों के लिए बड़ी कठिनाई का समय होता है, जिसमे अस्थमा से पीड़ित रोगी को अपने स्वस्थ का विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है! आयुर्वेदिक इलाज़ अस्थमा जैसे खतरनाक बीमारी की लिए बहुत उपयोगी और लाभप्रद है।

अस्थमा से बचने के उपाय

आयुर्वेद में ऐसी औषधियां मौजूद है जो अस्थमा के इलाज़ के लिए अत्यंत प्रभावशाली हैं अस्थमा रोगियों के लिए निम्न उपाय प्रयोग में लाने चाहिए

लहसुन, दमा के इलाज में काफी कारगर साबित होता है। 30 मिली दूध में लहसुन की पांचक लियां उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करने से दमे में शुरुआती अवस्था में काफी फायदा मिलता है। अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियाँ मिला कर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है। सबेरे और शाम इस चाय का सेवन करने से मरीज को फायदा होता है।

लौंग 4-5 नग लेकर 1०० मिलि लिटर पानी में उबालें आधा रह जाने पर छान लें और इस में एक चम्मच शहद मिलाकर गरम गरम पीयें। ऐसा काढा बनाकर दिन में तीन बार पीने से रोग नियंत्रित होकर दमे में आशातीत लाभ होता है।

तुलसी के 15-20 पत्ते पानी से साफ कर लें फ़िर उन पर काली मिर्च का पावडर बुरक कर खाने से दमा मे राहत मिलती है।

दमा के दौरे को नियंत्रित करने के लिये हल्दी एक चम्मच दो चम्मच शहद में मिलाकर चाट लें

एक चम्मच हल्दी एक गिलास दूध में मिलाकर पीने से दमा रोग काबू मे रहता है। एलर्जी नियंत्रित होती है

चाय बनाते वक्त 2 कली लहसुन की पीस कर डाल दें। यह दमे में राहत पहुंचाता है।

(जीवा अयुर्वेद के निदेशक डॉ प्रताप चैहान से बातचीत पर आधारित)

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