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विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धा के अवरोध को पार करते हुए अपने करियर के लिए दृढ़ निश्चयी रहना बेहद कम संस्थानों में ही सिखाया जाता

मुस्कान सिंह

मध्य प्रदेश के अंतर्गत देवास स्थित सरदाना इंटरनेशनल स्कूल सफल करियर के प्रति दृढ़ निश्चय के पूरक के रूप में विख्यात है, जो न सिर्फ अपने अलग तरह की अनूठी विचारधारा पर संचालित होता है, बल्कि सख्ती से अनुशासन के मार्ग पर चलने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित भी करता है। 

बदलती दुनिया में प्रतिस्पर्धा भी काफी तेजी से बढ़ रही है। शायद ही ऐसा कोई क्षेत्र होगा, जहाँ आज के समय में प्रतिस्पर्धा देखने को न मिले। और फिर जब बात शिक्षा के क्षेत्र की आती है, तो तमाम क्षेत्रों को पीछे छोड़ते हुए शिक्षा का क्षेत्र इस विषय में सबसे आगे दिखाई देता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि तमाम क्षेत्रों के रास्ते शिक्षा के दरवाज़े से होकर ही गुजरते हैं। ऐसे में प्रतिस्पर्धा के लिए शिक्षा को अव्वल दर्जा मिलना किसी मायने में गलत नहीं होगा। लेकिन प्रतिस्पर्धा के बीच एक समस्या का विद्यार्थी हमेशा ही सामना करते हैं, वह है अपने सफल करियर को लेकर दृढ़ निश्चय। क्षेत्र विशेष में दिन-प्रतिदिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा के डर से कई विद्यार्थी अपने सपनों की उड़ान को शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही रोक देते हैं। बेशक, शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों को उच्च स्तर की शिक्षा दी जाती है, लेकिन विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धा के अवरोध को पार करते हुए अपने करियर के लिए दृढ़ निश्चयी रहना बेहद कम संस्थानों में ही सिखाया जाता है। मध्य प्रदेश के अंतर्गत देवास स्थित सरदाना इंटरनेशनल स्कूल सफल करियर के प्रति दृढ़ निश्चय के पूरक के रूप में विख्यात है, जो न सिर्फ अपने अलग तरह की अनूठी विचारधारा पर संचालित होता है, बल्कि सख्ती से अनुशासन के मार्ग पर चलने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित भी करता है। 

सरदाना इंटरनेशनल स्कूल में विद्यार्थियों के बीच इस स्तर का कॉन्फिडेंस निर्मित किया जाता है कि वे भीड़ में अलग से निखरकर आते हैं। इसके पीछे संस्थान के संस्थापक और शिक्षाविद् ललित सरदाना का बहुत बड़ा योगदान है। सरदाना सर पिछले 26 वर्षों से फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथमेटिक्स तीनों ही विषय पढ़ा रहे हैं तथा भारत में सर्वाधिक सिलेक्शन अनुपात दे रहे हैं और स्वयं आईआईटी में ऑल इंडिया 243 वीं रैंक लगाने वाले और सरदाना इंटरनेशनल स्कूल के संचालक ललित सरदाना सर के स्कूल में पूरे भारत से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं।

विद्यार्थियों को बनाया जाता है अर्जुन के समान लक्ष्य साधक

संस्थान में विद्यार्थियों को लक्ष्य के प्रति अडिग रहने की सीख दी जाती है, साथ ही उन्हें राह में आने वाली बाधाओं से बखूबी अवगत कराया जाता है, जिससे कि उनका सामना करने के समय कुछ भी उनके लिए नया न हो और दृढ़ता से वे हर एक समस्या का सामना करते हुए अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते रहे। यह विद्यार्थियों को अर्जुन की तरह लक्ष्य साधक बनाने का कार्य करता है, जो उनके करियर के हर एक मोड़ पर उन्हें सफलता से रूबरू कराता है।

शत-प्रतिशत तक सफलता के आँकड़ें

सरदाना इंटरनेशनल स्कूल की यह खासियत है कि यहाँ सफलता के आँकड़ें शत-प्रतिशत होते हैं। इसका सटीक कारण है कि यहाँ विद्यार्थियों को समय की बर्बादी न करने की सीख देने के साथ ही वर्षभर बिना किसी छुट्टी के लगातार परीक्षाओं की तैयारी करवाई जाती है। इसके अतिरिक्त, विगत वर्षों के पेपर्स की प्रैक्टिस कराने के साथ ही 40 से भी अधिक फुल सिलेबस के टेस्ट लिए जाते हैं। स्कूल में तैयार किए गए 90 हजार से अधिक प्रश्नों के मटेरियल के तहत प्रतिदिन न्यूनतम 200 प्रश्नों की प्रैक्टिस करवाई जाती है। इस तरह की तैयारी विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धा से डरने के बजाए उन्हें इसके लिए सुदृढ़ बनाती है।

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