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गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ाने में सहायक है योग

माँ बनना एक सुखद एहसास होता है। अपने बच्चे की किलकारियां सुनना हर महिला का सपना होता है, लेकिन जब किसी दंपत्ति को निःसंतानता का सामना करना पड़ता है, तो उनका संसार जैसे बिखर जाता है। वे निराश और हताश हो जाते हैं, मानो जीवन उनसे दूर जा रहा हो। ऐसे कठिन समय में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि आप शांत रहें और इस बात पर ध्यान केंद्रित करें कि गर्भधारण की संभावनाओं को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है।

योग विशेषज्ञ अल्का सिंह बताती हैं कि कैसे योग गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ाने में सहायक हो सकता है और साथ ही यह तनाव व चिंता को भी दूर करने में मदद करता है।

योग और मानसिक स्वास्थ्य

योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य को भी सशक्त करता है। यह तनाव को कम करता है, मन को शांत करता है, और स्पष्टता प्रदान करता है। प्राचीन काल से योग हमारे जीवन का हिस्सा रहा है और इसके नियमित अभ्यास से स्मृति, एकाग्रता और मानसिक शांति में सुधार होता है।

फर्टिलिटी योग: प्रजनन क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक कदम

आजकल फर्टिलिटी योग तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, विशेषकर उन लोगों के बीच जो लंबे समय से संतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह योगासन प्रजनन संबंधी तनाव को कम करने और गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ाने में मदद करते हैं।

योग और प्रजनन क्षमता का संबंध

1. शरीर और मन का तालमेल

मन को नियंत्रित करने के लिए शरीर और मस्तिष्क के बीच तालमेल जरूरी होता है। योग न केवल मानसिक तनाव को कम करता है बल्कि वजन घटाकर भी गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ाता है।

2. हार्मोनल संतुलन में सुधार

हार्मोनल असंतुलन निःसंतानता का सामान्य कारण होता है। योग और संतुलित आहार से अंतःस्रावी ग्रंथियों का स्वास्थ्य बेहतर बनाकर हार्मोन का स्तर संतुलित किया जा सकता है।

3. रक्त परिसंचरण में सुधार

प्रजनन तंत्र में रुकावटें रक्त परिसंचरण की कमी से उत्पन्न होती हैं। योग शरीर से विषाक्त तत्वों को बाहर निकालकर परिसंचरण को बेहतर करता है।

4. मांसपेशियों की टोनिंग और वजन नियंत्रण

योग मांसपेशियों को मजबूत करने और वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे मोटापा घटता है और गर्भधारण की संभावना बढ़ती है।

गर्भधारण के लिए लाभकारी योगासन

नीचे कुछ योगासन दिए गए हैं जो प्रजनन अंगों को सक्रिय करते हैं और गर्भधारण की संभावना बढ़ाते हैं:

● जानु सिरसासन

मस्तिष्क को शांत करता है और रीढ़, लीवर, प्लीहा व हैमस्ट्रिंग को स्ट्रेच करता है।

● पश्चिमोत्तानासन

पेट और पैल्विक अंगों को टोन करता है, मानसिक तनाव कम करता है और अंडाशय व गर्भाशय को लाभ पहुंचाता है।

● बड्डा कोणासन (तितली मुद्रा)

कूल्हों, जांघों और जननांगों की मांसपेशियों को फैलाता है, और रक्त प्रवाह को बढ़ाता है।

● भ्रामरी प्राणायाम

तनाव, क्रोध और चिंता को दूर करता है, और मन को शांत करता है।

● बालासन (बच्चे की मुद्रा)

घुटनों, पीठ और कूल्हों की मांसपेशियों को फैलाता है। यह शारीरिक व मानसिक तनाव दूर करता है।

● शवासन

पूरे शरीर को आराम देने वाला आसन, जो चिंता को कम करता है और गहरी शांति प्रदान करता है।

अंततः योग का अभ्यास करके बांझपन की समस्या तक को भी ठीक किया जा सकता है क्योंकि योग शरीर के तनाव को दिमाग की थकान को दूर करके हमारे हार्मोननल इनबैलेंस को ठीक करता है जिससे बांझपन की समस्या ठीक होने लगती है इसलिए रोज करें योग स्वस्थ रहें मस्त रहें खुश रहें।

आधुनिक वैश्विक कल्याण संस्थान (ट्रस्ट) और एवीके न्यूज सर्विस के संयुक्त प्रयास से योग सप्ताह (ऑनलाइन जागरूकता कार्यक्रम) चलाया जा रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य योग के महत्व, लाभ और इसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रति जनसामान्य को जागरूक करना है।

अलका सिंह योग विशेषज्ञ
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