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भारत के आर्थिक परिवर्तन में नवाचार और सहयोग की भूमिका : डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर का प्रेरक संदेश

इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2025 के तीसरे दिन आयोजित भव्य आईएमसी-25 पुरस्कार समारोह में केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने देश के व्यापारिक समुदाय, उद्यमियों और तकनीकी नवप्रवर्तकों को एक सशक्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत आज तकनीकी बदलाव और डिजिटल अपनाने के एक “असाधारण मोड़” पर खड़ा है, जहां नवाचार, सहयोग और उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व ही राष्ट्र की आर्थिक दिशा तय करेगा।

नवाचार और उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व की आवश्यकता

डॉ. चंद्रशेखर ने कहा कि आज का भारत पाँच वर्ष पहले वाला भारत नहीं है। देश तेजी से डिजिटल युग में प्रवेश कर चुका है और हर क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के उपयोग से नई संभावनाएँ खुल रही हैं। उन्होंने व्यापारिक समुदाय से आग्रह किया कि वे केवल लाभ केंद्रित न होकर उद्देश्य-संचालित नेतृत्व को अपनाएं। उनके अनुसार, भविष्य उन्हीं का होगा जो समाज, पर्यावरण और व्यवसाय के बीच संतुलन स्थापित कर सकेंगे।

उन्होंने कहा, “लाभ को उद्देश्य के साथ जोड़िए। ईएसजी केवल एक अनुपालन चेकबॉक्स नहीं, बल्कि 21वीं सदी के व्यवसाय का सामाजिक अनुबंध है।” उनके इस वक्तव्य ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार नवाचार के साथ-साथ सामाजिक ज़िम्मेदारी और सतत विकास को भी समान रूप से महत्व देती है।

डिजिटल भारत का नया अध्याय

मंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत की उल्लेखनीय प्रगति के पीछे तेज़ डिजिटल अपनाने और तकनीकी अनुकूलन की निर्णायक भूमिका रही है। आज का भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा एनालिटिक्स, और साइबर इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि अब समय है जब भारत का व्यापारिक समुदाय इन तकनीकों का लाभ उठाकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी स्थान बनाए।

भविष्य की दिशा बताते हुए उन्होंने उद्योगों से अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश बढ़ाने, प्रयोगशील संस्कृति को बढ़ावा देने और स्टार्टअप्स व एमएसएमई के साथ सहयोग को प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने कहा, “भविष्य इकोसिस्टम का है, एकाधिकार का नहीं।”

स्टार्टअप और उद्यमशीलता का नया युग

डॉ. चंद्रशेखर ने उन उद्यमियों की प्रशंसा की जिन्होंने साहसपूर्वक नए विचारों को हकीकत में बदला। उन्होंने कहा कि “97 प्रतिशत लोग जो कहते हैं कि वे कंपनी शुरू करेंगे, वे कभी निगमित नहीं होते, लेकिन आपने किया।” यह कथन न केवल सफल स्टार्टअप्स के प्रति सम्मान का प्रतीक था, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा भी।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य एक ऐसा इनोवेशन-ड्रिवन इकोसिस्टम बनाना है, जहां नई कंपनियाँ आसानी से स्थापित हो सकें, अनुसंधान को प्रोत्साहन मिले और युवा उद्यमी अपने विचारों को विश्व स्तर पर ले जा सकें।

पुरस्कार: सम्मान और ज़िम्मेदारी दोनों

आईएमसी-25 पुरस्कार समारोह के विजेताओं को बधाई देते हुए डॉ. चंद्रशेखर ने कहा कि ये पुरस्कार केवल उपलब्धि का प्रतीक नहीं, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा भी हैं। उन्होंने कहा, “ये पुरस्कार कोई मंज़िल नहीं, बल्कि भविष्य के लिए ईंधन हैं। बड़ी सफलता के साथ कर्मचारियों, समुदायों और राष्ट्र के प्रति बड़ी ज़िम्मेदारी भी आती है।”

मंत्री ने इस अवसर पर उपस्थित सभी प्रतिभागियों से कहा कि वे अपनी उपलब्धियों को समाज के विकास से जोड़ें और नई पीढ़ी को नवाचार के लिए प्रेरित करें।

‘मेड इन इंडिया’ को गुणवत्ता और उत्कृष्टता का प्रतीक बनाना

अपने भाषण के समापन में डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने भारत के उद्योगों को आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर अग्रसर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “भूखे रहिए, निर्माण करते रहिए। मैं आत्मनिर्भर भारत के निर्माताओं को देख रहा हूँ।”

उन्होंने एक ऐसे भविष्य की कल्पना की जहाँ ‘मेड इन इंडिया’ केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि गुणवत्ता, नवाचार और वैश्विक उत्कृष्टता का पर्याय बन जाए। यह वक्तव्य प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप था, जो देश को निर्माण, नवाचार और रोजगार के नए युग में ले जा रहा है।

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