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कृषि, ऋषि और कुर्सी के जन-संयोजन से महाक्रांति संभव: गणि राजेन्द्र विजय

सुखी परिवार फाउंडेशन द्वारा मासिक धर्म स्वच्छता क्रांति का शंखनाद

नई दिल्ली : आदिवासी महिलाओं के जीवन स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखते हुए सुखी परिवार फाउंडेशन ने आज जैन मुनि डॉ. गणि राजेन्द्र विजय के आध्यात्मिक मार्गदर्शन में ‘मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता जागरूकता अभियान’ की शुरुआत की। नई दिल्ली के लोदी रोड स्थित चिन्मय मिशन ऑडिटोरियम में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। विशेषतः गुजरात के आदिवासी अंचल से बड़ी संख्या में महिलाओं ने संभागिता की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर जो राष्ट्रीय अभियान चल रहा है, उसने देश के दूरस्थ क्षेत्रों तक एक सकारात्मक संदेश पहुंचाया है। मासिक धर्म स्वच्छता जैसे विषय पर राष्ट्रव्यापी संवाद अब ‘स्वस्थ भारत’ के निर्माण का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।” उन्होंने सुखी परिवार फाउंडेशन द्वारा आदिवासी क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों, विशेषकर महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण, जागरूकता और स्वच्छता पर केंद्रित गतिविधियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पहल वास्तव में वंचित समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि “प्रधानमंत्री मोदी के स्वास्थ्य अभियान का मूल मंत्र है- स्वच्छता और स्वास्थ्य, दोनों का समन्वय। जब तक स्वच्छता व्यवहार का हिस्सा नहीं बनती, तब तक स्वास्थ्य सुरक्षा संभव नहीं है। सुखी परिवार फाउंडेशन का यह अभियान इस दिशा में राष्ट्रीय प्रयासों को गति देने वाला है।” राष्ट्रीय मानवाधिकार के महासचिव श्री भरतलालजी ने महिला स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को लेकर तथ्यपरक वक्तव्य प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के मुख्य प्रेरणास्रोत जैन मुनि डॉ. गणि राजेन्द्र विजय ने अपने संबोधन में स्वच्छता और सामाजिक चेतना को आध्यात्मिक दृष्टि से जोड़ते हुए कहा कि “जहां कृषि, ऋषि और कुर्सी का जन-संयोजन होता है, वहां एक महाक्रांति घटित होती है। आज स्वच्छता और संवेदना के संगम से समाज में एक नई क्रांति की शुरुआत हो रही है।” उन्होंने कहा कि मासिक धर्म जैसे विषय पर खुला संवाद समाज की परिपक्वता को दर्शाता है और यह आंदोलन महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ-साथ उनकी गरिमा और आत्मविश्वास को भी नई दिशा देगा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने सुखी परिवार फाउंडेशन की इस पहल को उस साहसिक कदम के रूप में सराहा जिसने आदिवासी महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े सबसे उपेक्षित मुद्दे, मासिक धर्म स्वच्छता को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सच्चा विकास तभी संभव है जब हर महिला सुरक्षित, स्वस्थ, जागरूक और सम्मानित जीवन जी सके।

सुखी परिवार फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री ललित गर्ग ने बताया कि पिछले कई वर्षों से आदिवासी समुदायों में शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार सृजन, पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। अब इस नए अभियान के साथ संस्था ने अपने सामाजिक पुनर्निर्माण मिशन में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा है। अभियान के प्रथम चरण का लक्ष्य देशभर की 50,000 आदिवासी महिलाओं तक पहुँचना है। इसके अंतर्गत शिक्षा-सत्र, स्वास्थ्य शिविर, पर्यावरण अनुकूल सेनेटरी उत्पादों का वितरण और स्वच्छता संबंधी व्यवहार परिवर्तन के लिए व्यापक जनचेतना अभियान चलाया जाएगा। यह कार्यक्रम स्थानीय स्वशासन संस्थाओं, एनजीओ, स्वास्थ्यकर्मियों और स्वयंसेवकों के सहयोग से संचालित किया जाएगा।

यह पहल केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक सामाजिक आंदोलन है, जिसका उद्देश्य मौन को संवाद में और संवाद को सशक्तिकरण में बदलना है। यह अभियान मासिक धर्म से जुड़ी कुप्रथाओं, वर्जनाओं और भ्रांतियों को मिटाकर स्वास्थ्य, समानता और गरिमा पर आधारित नए सामाजिक दृष्टिकोण को जन्म देगा।

इस अवसर पर सुखी परिवार फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री ललित गर्ग ने अतिथियों का सम्मान गुलदस्ता व मोमेन्टो देकर और शाॅल ओढ़ाकर किया। सामाजिक कार्यकर्ता एवं लेखिका श्रीमती संगीता शुक्ला ने समाज से आह्वान किया कि वे आदिवासी महिलाओं के मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए इस अभियान में सहयोग दें। देशभर से आए एनजीओ प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विचारकों ने कार्यक्रम में भाग लेकर इस मानवीय मिशन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। समाज के विभिन्न क्षेत्र की प्रतिभाओं को इस अवसर पर सम्मानित किया गया।

सुखी परिवार फाउंडेशन ने दानदाताओं, संस्थानों और नागरिकों से अपील की कि वे इस पवित्र और राष्ट्रीय महत्व के अभियान में सहभागी बनें ताकि देश की हर महिला, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में रहती हो, स्वास्थ्य, गरिमा और आत्मविश्वास के साथ एक सम्मानजनक जीवन जी सके।

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