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वैदिक पारिवारिक व्यवस्था बच्चों के विकास हेतु वरदान: डॉ. दयाशंकर मिश्र

सेमिनार हॉल, साइंस फैकल्टी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय में नई सुबह इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एण्ड बिहेवियरल साइंसेज व्दारा आयोजित बाल विकास का मनोविज्ञान विषेयक तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार /सतत पुनर्वास शिक्षा कार्यक्रम के समापन कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार में आयुष, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ जी कहा कि परिवार मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण आधार है और संयुक्त परिवार बच्चों के विकास के लिए वरदान है। दादा-दादी व नाना – नानी कहानियों के माध्यम से बच्चों में सकारात्मकता, धनात्मक सोच व धैर्य का संचार करते हैं। एकांकी परिवार में बच्चे भरत के किदरदार को कैसे समझेंगे। मोबाइल श्रवण कुमार की कहानी नहीं सुना सकता है। एकल परिवार का बढ़ता चलन एवं आधुनिक जीवन शैली बच्चों व युवा पीढ़ी को संस्कारों से दूर ले जा रहा है समाज को इस पर गहन चिंतन करके समाधान ढूंढना आवश्यक है।

वैदिक पारिवारिक व्यवस्था बच्चों के विकास हेतु वरदान: डॉ. दयाशंकर मिश्र

विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधीक्षक केंद्रीय कारागार वाराणसी श्री राधा कृष्ण मिश्रा जी ने कहां की बच्चों के विकास के मनोविज्ञान पर सेमिनार करना राष्ट्र निर्माण से जुड़ा हुआ मुद्दा है क्योंकि किसी भी राष्ट्र का भविष्य बच्चों से जुड़ा होता है जब बच्चों का संतुलित विकास होगा तभी राष्ट्र का सर्वोत्तम विकास होगा। बच्चों के विकास में परिवार के वातावरण तथा परिवार के सदस्यों द्वारा दिए गए संस्कार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि 95 बटालियन सीआरपीएफ के कमांडेंट राजेश्वर बालापुरकर जी ने कहा कि एकल परिवार में बच्चों से बातचीत करने वाला कोई नहीं होता जिससे बच्चे अत्यधिक मोबाइल का उपयोग करते हैं और आउटडोर खेलों से दूर होते जा रहे हैं अभिभावकों का बच्चों से अनापेक्षित अपेक्षाएं भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए चुनौती है इन सारे स्थितियां का निराकरण कर बच्चों के विकास को सही दिशा प्रदान की जा सकती है।

आयोजन समिति के अध्यक्ष व वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ अजय तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि बच्चों के विकास में मनोवैज्ञानिकों के महत्वपूर्ण भूमिका होती है मनोवैज्ञानिक गर्भावस्था से लेकर बाल्यावस्था तक बच्चों के स्वास्थ्य देखभाल के लिए उचित परामर्श एवं मार्गदर्शन प्रदान करता है। कार्यक्रम में नई सुबह संस्था के पीजीडीआरपी सत्र 2024-25 के सफल छात्रों को डिग्री तथा सतत पुनर्वास शिक्षा कार्यक्रम के प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। राष्ट्रीय सेमिनार सतत पुनर्वास शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत तीन दिनों में बच्चों के विकास का मनोविज्ञान पर 23 विभिन्न विषयों पर विशषज्ञों ने प्रशिक्षण प्रदान किया गया व 27 शोधपत्र पढा गया। कार्यक्रम को डॉ एस के प्रसाद पूर्व उप मुख्य दिव्यांगजन आयुक्त एवं रोहतक हरियाणा के नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ मुकेश कुमार ने संबोधित किया।

कार्यक्रम में प्रो राजीव बाटला, जिओ फिजिक्स, बीएचयू, डॉ मनोज कुमार तिवारी वरिष्ठ परामर्शदाता एआरटीसी, बीएचयू, श्रीमती सुनीता तिवारी, उपनिदेशक अनुराग तिवारी, डॉ अमित तिवारी, राजीव सिंह, गौरव चक्रवर्ती, अर्पित मिश्रा एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। देश भर से 400 से अधिक क्लीनिकल व पुनर्वास मनोवैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता, विशेष शिक्षक ने सहभागिता किया। कार्यक्रम का संचालन पारुल मिश्रा व रलिका तिवारी तथा अतिथियों का स्वागत धन्यवाद ज्ञापन डॉ अजय तिवारी ने किया।

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