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भारत और भूटान ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को देंगे नई मजबूती

भारत और भूटान के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत भूटान के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री ल्योंपो जेम त्शेरिंग ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा तथा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल और ऊर्जा तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक से मुलाकात की। यह बैठक भारत और भूटान के बीच ऊर्जा क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को नई दिशा देने पर केंद्रित रही।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भारत और भूटान की साझेदारी केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी विश्वास, मित्रता और साझा विकास दृष्टिकोण पर आधारित एक रणनीतिक संबंध का उदाहरण है। मंत्रियों ने माना कि ऊर्जा सहयोग दोनों देशों की आर्थिक प्रगति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भारत और भूटान के बीच जलशक्ति सहयोग की शुरुआत वर्ष 1961 में हुई थी, जिसने दोनों देशों के ऊर्जा संबंधों की मजबूत नींव रखी। इसके बाद वर्ष 2006 में जलविद्युत सहयोग से संबंधित औपचारिक समझौते के माध्यम से इस साझेदारी को संस्थागत स्वरूप प्रदान किया गया। तब से अब तक जलविद्युत परियोजनाएं भारत-भूटान संबंधों का प्रमुख स्तंभ बनी हुई हैं।

आज की चर्चा में दोनों देशों ने पुनात्सांगचू द्वितीय जलविद्युत परियोजना, जिसकी स्थापित क्षमता 1020 मेगावाट है, से व्यावसायिक रूप से सर्वोत्तम स्तर पर बिजली उत्पादन सुनिश्चित करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया। परियोजना से जुड़े तकनीकी, संचालन और समयबद्धता के पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई ताकि उत्पादन क्षमता का पूर्ण उपयोग किया जा सके।

इसके साथ ही, पुनात्सांगचू प्रथम जलविद्युत परियोजना, जिसकी क्षमता 1200 मेगावाट है, को शीघ्र चालू करने की आवश्यकता पर भी दोनों पक्षों ने बल दिया। इस परियोजना के संचालन में तेजी लाने से न केवल भूटान की ऊर्जा निर्यात क्षमता बढ़ेगी, बल्कि भारत को भी स्वच्छ और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

बैठक में संकोश जलविद्युत परियोजना के भविष्य के दृष्टिकोण पर भी गहन चर्चा हुई। दोनों देशों ने इस परियोजना को दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश के रूप में देखते हुए इसके विकास की संभावनाओं, तकनीकी व्यवहार्यता और पर्यावरणीय पहलुओं पर विचार किया।

इसके अतिरिक्त, भारत और भूटान ने वर्ष 2040 तक के लिए विद्युत पारेषण अवसंरचना की दीर्घकालिक योजना पर भी चर्चा की। इस योजना के तहत दोनों देशों के बीच बिजली के निर्बाध आदान-प्रदान को सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक और मजबूत पारेषण नेटवर्क विकसित करने पर जोर दिया गया। इसके लिए वर्तमान में विस्तृत परामर्श प्रक्रिया जारी है, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञों और संबंधित एजेंसियों की भागीदारी शामिल है।

बैठक के दौरान भूटान में विशेष रूप से कम आपूर्ति वाले महीनों के दौरान बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की आवश्यकता पर भी विचार किया गया। दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि सरल और समयबद्ध प्रक्रियाएं ऊर्जा सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाएंगी।

मंत्रियों ने भारत और भूटान के बीच पारंपरिक मित्रता और आपसी विश्वास की सराहना करते हुए कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग इस संबंध को और प्रगाढ़ करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में दोनों देश मिलकर स्वच्छ ऊर्जा, सतत विकास और क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्यों को आगे बढ़ाएंगे।

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