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निर्माण क्षेत्र में वैकल्पिक ईंधन और नवाचार को अपनाने की आवश्यकता: नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने निर्माण एवं अवसंरचना क्षेत्र में वैकल्पिक ईंधनों, उन्नत प्रौद्योगिकियों और सतत पद्धतियों को तेजी से अपनाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि भविष्य के अवसंरचना विकास के लिए नवाचार-आधारित दृष्टिकोण अनिवार्य हो गया है।

नई दिल्ली में आयोजित 17वें Construction Industry Development Council (CIDC) विश्वकर्मा पुरस्कार एवं प्रदर्शनी ‘विकसित भारत 2047’ को संबोधित करते हुए गडकरी ने ज्ञान को आर्थिक शक्ति में परिवर्तित करने के लिए नवाचार, उद्यमिता, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि निरंतर तकनीकी परिवर्तन निर्माण क्षेत्र को नए आयाम दे रहे हैं।

गडकरी ने परियोजनाओं की लागत कम करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकों के समुचित उपयोग और प्रक्रियात्मक सुधारों से न केवल दक्षता बढ़ेगी, बल्कि परियोजनाओं की कुल लागत में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। उन्होंने त्वरित निर्णय, बेहतर परियोजना नियोजन और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता को अवसंरचना विकास की आधारशिला बताया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण और वैधानिक स्वीकृतियों जैसी पूर्व-आवश्यकताओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इनकी देरी से परियोजनाओं की समयसीमा और ठेकेदारों की वित्तीय स्थिति प्रभावित होती है। गडकरी ने गुणवत्ता आधारित मूल्यांकन प्रणाली पर जोर देते हुए कहा कि लागत के साथ-साथ प्रदर्शन और टिकाऊपन को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

सतत विकास की दिशा में उन्होंने जैव ईंधन, जैव द्रव्यमान आधारित ईंधन और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग की संभावनाओं को तलाशने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इनसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम होगी और परिचालन लागत घटेगी। इसके साथ ही उन्होंने सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे और उपयोग किए गए टायरों के पुनर्चक्रण जैसे ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ मॉडल को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

गडकरी ने नागपुर में प्लास्टिक कचरे के उपयोग से बनी सड़कों का उल्लेख करते हुए इसे सफल नवाचार का उदाहरण बताया और कहा कि इस प्रकार की तकनीकों से टिकाऊ अवसंरचना निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति संभव है।

उन्होंने उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और शिक्षा जगत के बीच समन्वय को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि भविष्य उन्मुख निर्माण प्रौद्योगिकियों का विकास तेज हो सके। गडकरी ने यह भी उल्लेख किया कि भारतीय अवसंरचना कंपनियां दुबई, कतर और अफ्रीकी देशों में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर चुकी हैं और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने 17वें CIDC विश्वकर्मा पुरस्कारों के विजेताओं को सम्मानित किया और निर्माण क्षेत्र में गुणवत्ता एवं नवाचार के लिए उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने विश्वास जताया कि इंजीनियरों, बिल्डरों और पेशेवरों का यह वर्ग ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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