-3 मई, विश्व हास्य दिवस के अवसर पर-
विश्व हास्य दिवस प्रतिवर्ष मई माह की 3 तारीख को पूरे विश्व में मनाया जाता है। इस दिवस का प्रथम आयोजन 11 जनवरी 1998 को मुंबई में किया गया था। विश्व हास्य योग आंदोलन की स्थापना का श्रेय भारतीय चिकित्सक डॉ. मदन कटारिया को जाता है।

हास्य योग के अनुसार, हँसी एक सकारात्मक और शक्तिशाली भावना है, जो व्यक्ति को ऊर्जावान बनाती है और संसार को शांतिपूर्ण बनाने के सभी तत्व अपने भीतर समेटे होती है। विश्व हास्य दिवस का उद्देश्य विश्व में शांति स्थापित करना तथा मानव मात्र में भाईचारा और सद्भाव बढ़ाना है।
आज हास्य योग आंदोलन के माध्यम से इस दिवस की लोकप्रियता पूरे विश्व में फैल चुकी है। हँसना या हास्यपूर्ण जीवन जीना स्वास्थ्य और सुखद जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। यही कारण है कि आज विश्वभर में हजारों हास्य क्लब सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर विभिन्न शहरों में रैलियाँ, गोष्ठियाँ और सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं।
वर्तमान समय में जब विश्व आतंकवाद और युद्धों—जैसे रूस-यूक्रेन संघर्ष, इज़राइल-फिलिस्तीन विवाद के बाद संभावित तनाव—के कारण भय और अस्थिरता से घिरा हुआ है, तब ‘विश्व हास्य दिवस’ की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। ऐसा प्रतीत होता है मानो आज हर व्यक्ति के भीतर एक अदृश्य तनाव का कोलाहल है। ऐसे नकारात्मक वातावरण में हँसी ही वह शक्ति है, जो सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकती है।
हास्य योग के अनुसार, हँसी व्यक्ति के विद्युत-चुंबकीय क्षेत्र को प्रभावित कर उसमें सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करती है। जब लोग समूह में हँसते हैं, तो यह ऊर्जा पूरे वातावरण में फैलती है और नकारात्मकता को दूर करती है।
जीवन में हमारे पास दो विकल्प होते हैं—एक, गंभीर और बोझिल वातावरण में रहना; दूसरा, ज़िंदादिल और प्रसन्नचित लोगों के साथ रहना। स्वाभाविक रूप से अधिकांश लोग दूसरा विकल्प ही चुनते हैं। जैसा कि कहा गया है— “ज़िंदगी ज़िंदादिली का नाम है, मुर्दादिल क्या खाक जिया करते हैं। ”उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रेलवे स्टेशन पर लिखा एक वाक्य —“मुस्कुराइए कि आप लखनऊ में हैं”
—यात्रियों के चेहरे पर तुरंत मुस्कान ला देता है। यह वाक्य उस शहर की जीवंतता और सकारात्मकता का प्रतीक है। हँसना एक विशिष्ट मानवीय गुण है। सृष्टि में केवल मनुष्य ही ऐसा प्राणी है, जिसे ईश्वर ने हँसने का वरदान दिया है। इसलिए हमें इस अनमोल उपहार का पूरा उपयोग करना चाहिए।
हँसी के अनेक लाभ हैं- यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाती है। हँसने से शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है और दूषित वायु बाहर निकलती है। डायफ्राम की सक्रियता से पेट, फेफड़े और यकृत की मालिश होती है। रक्त संचार तीव्र होता है और पाचन तंत्र बेहतर कार्य करता है।
हार्मोन संतुलन (एंडोक्राइन सिस्टम) सुधरता है।
मनोवैज्ञानिक शोध बताते हैं कि अधिक हँसने वाले बच्चे अधिक बुद्धिमान होते हैं। जापान जैसे देशों में बच्चों को बचपन से ही हँसमुख रहने की शिक्षा दी जाती है। आज के तनावपूर्ण जीवन में जब उच्च रक्तचाप, मधुमेह, माइग्रेन, अवसाद जैसी बीमारियाँ बढ़ रही हैं, तब हँसी एक प्राकृतिक औषधि के रूप में सामने आती है। हास्य एक सार्वभौमिक भाषा है, जो जाति, धर्म, रंग और लिंग से परे जाकर मानवता को जोड़ने की क्षमता रखती है।
हँसी जीवन का प्रभात है,
यह शीत ऋतु की मधुर धूप है,
ग्रीष्म की तपती दोपहरी
में सघन राहती छाया है।
संध्या की थकी घड़ियों
में सुकून भरी मृदुल माया है।।
हँसने से आत्मा प्रसन्न होती है, और आप स्वयं के साथ-साथ दूसरों को भी आनंदित करते हैं। हास्य, पीड़ा का शत्रु, चिंता का उपचार और दुःखों का रामबाण है। इसलिए आइए, इस विश्व हास्य दिवस पर हम संकल्प लें।
खुद भी मुस्कुराएँ और दूसरों के चेहरे पर भी मुस्कान लाएँ।
