बड़े सटोरिए गिरफ्तार, लेकिन खेलने वालों पर कार्रवाई कब?
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में आईपीएल सीजन के दौरान पुलिस ने ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ जिस आक्रामकता के साथ अभियान चलाया था, वह अब अपेक्षाकृत शांत दिखाई दे रहा है। ऐसे में आम नागरिकों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या सट्टा विरोधी अभियान की धार कुंद पड़ गई है, या फिर पुलिस ने अपनी रणनीति बदल ली है?
प्रदेशभर में पुलिस ने हाल के महीनों में कई बड़े सट्टा नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। बिलासपुर, रायपुर सहित अनेक जिलों में करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन उजागर हुए, दर्जनों सटोरिए गिरफ्तार किए गए और बड़ी मात्रा में नकदी, मोबाइल, लैपटॉप, बैंक खाते तथा लग्जरी वाहन जब्त किए गए। इसके बावजूद लोगों का मानना है कि कार्रवाई अभी अधूरी है।
केवल खिलाने वाले ही नहीं, खेलने वालों पर भी हो कार्रवाई
सामाजिक संगठनों और नागरिक प्रतिनिधियों का कहना है कि पुलिस ने सट्टा खिलाने वालों के खिलाफ तो प्रभावी कार्रवाई की, लेकिन सट्टा खेलने वालों की संख्या उनसे कई गुना अधिक है। यदि इस वर्ग पर भी सख्ती से कार्रवाई की जाए तो अवैध सट्टा कारोबार की जड़ें काफी हद तक समाप्त हो सकती हैं। लोगों का मानना है कि सट्टा कारोबार को आर्थिक सहयोग देने वाले साहूकारों और उधार में पूंजी उपलब्ध कराने वालों की भी पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए। केवल एजेंटों और स्थानीय संचालकों को पकड़ लेने से पूरा नेटवर्क समाप्त नहीं होगा।

रायपुर में बड़े ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट ध्वस्त
रायपुर पुलिस कमिश्नरेट और क्राइम ब्रांच ने मई-जून के दौरान संयुक्त अभियान चलाकर कई बड़े ऑनलाइन सट्टा पैनलों का भंडाफोड़ किया। पुलिस ने “लोटस 365” जैसे चर्चित प्लेटफॉर्म सहित पांच बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने का दावा किया।
इस अभियान के तहत कोलकाता, हरियाणा और बिहार तक छापेमारी की गई तथा 14 अलग-अलग सट्टा समूहों से जुड़े 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के कब्जे से लाखों रुपये नकद, दर्जनों एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए।
जांच में कई बड़े संचालकों और अंतरराज्यीय नेटवर्क की भूमिका भी सामने आई है, जिनके तार देश के विभिन्न राज्यों तक फैले हुए बताए जा रहे हैं।

