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डायमंड ग्रुप के चेयरमैन नरेन्द्र कुमार वर्मा की स्मृति में प्रार्थना सभा; साहित्य और प्रकाशन जगत ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित ‘प्रार्थना सभा एवं जीवनोत्सव’ में लेखकों, प्रकाशकों, शिक्षाविदों, मित्रों और शुभचिंतकों ने साझा कीं आत्मीय स्मृतियाँ

 नई दिल्ली। भारतीय प्रकाशन जगत के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व, डायमंड ग्रुप के चेयरमैन एवं डायमंड पॉकेट बुक्स के निदेशक श्री नरेन्द्र कुमार वर्मा की स्मृति में सोमवार, 13 जुलाई को नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टीन ऑडिटोरियम में “Prayer Meeting & Celebration of Life—प्रार्थना सभा एवं जीवनोत्सव” का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर साहित्य, प्रकाशन, शिक्षा, मीडिया, संस्कृति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति, वरिष्ठ लेखक, प्रकाशक, शिक्षाविद, मित्र, सहयोगी और शुभचिंतक उपस्थित रहे। उन्होंने नरेन्द्र कुमार वर्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके साथ बिताए आत्मीय क्षणों तथा प्रकाशन जगत में उनके योगदान को याद किया। 

सभा का वातावरण शोक के साथ-साथ कृतज्ञता और स्मृतियों से भरा था। वक्ताओं ने कहा कि नरेन्द्र कुमार वर्मा केवल एक सफल प्रकाशक नहीं थे; वे लेखकों के मार्गदर्शक, पुस्तक संस्कृति के समर्थक और संबंधों को विश्वास के साथ निभाने वाले संवेदनशील व्यक्ति थे। उन्होंने प्रतिष्ठित साहित्यकारों के साथ-साथ अनेक नए लेखकों को भी अवसर दिया और उन्हें अपनी रचनात्मक यात्रा आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।

वक्ताओं ने उनके सरल, सौम्य, विनम्र और कर्मनिष्ठ व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि उनकी सबसे बड़ी विशेषता लोगों को सुनना और उनमें संभावनाएँ पहचानना थी। उनके लिए प्रकाशन केवल पुस्तक तैयार करने और बेचने की प्रक्रिया नहीं था, बल्कि लेखक, पाठक और समाज के बीच एक सार्थक संबंध स्थापित करने का माध्यम था।

पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. किरण बेदी ने उनके साथ अपने लंबे संबंध को याद करते हुए कहा कि नरेन्द्र कुमार वर्मा ने उनकी अनेक पुस्तकों को पाठकों तक पहुँचाया और उनके सामाजिक प्रयासों को भी निरंतर सहयोग दिया। उन्होंने स्मरण किया कि उनका संबंध औपचारिक अनुबंधों से अधिक पारस्परिक विश्वास पर आधारित था। यह प्रसंग उस मानवीयता और भरोसे का प्रतीक था, जिसे वर्मा ने अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में सदैव प्राथमिकता दी। 

सभा में उपस्थित लेखकों और प्रकाशन जगत से जुड़े लोगों ने उनके साथ बिताए संस्मरण साझा किए। उन्हें ऐसे प्रकाशक के रूप में याद किया गया, जो किसी पांडुलिपि के पीछे छिपे लेखक के सपने को भी समझते थे। अनेक वक्ताओं ने हिंदी और भारतीय भाषाओं के साहित्य को व्यापक पाठक-वर्ग तक पहुँचाने, नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और पुस्तक संस्कृति को जनसुलभ बनाने में उनके योगदान को रेखांकित किया। 

3 नवम्बर 1948 को दिल्ली में जन्मे नरेन्द्र कुमार वर्मा ऐसे परिवार से थे, जिसकी पुस्तक-व्यवसाय की जड़ें विभाजन-पूर्व मुल्तान तक जाती थीं। विभाजन के बाद परिवार ने दिल्ली में कठिन परिस्थितियों के बीच अपने व्यवसाय को पुनः स्थापित किया। परिवार की इस संघर्षपूर्ण यात्रा ने उनके व्यक्तित्व में श्रम, अनुशासन, धैर्य और निरंतर आगे बढ़ने का भाव विकसित किया।

शिक्षा पूरी करने के बाद वे पारिवारिक पुस्तक-व्यवसाय से जुड़े और समय के साथ डायमंड को पुस्तकों, पॉकेट बुक्स, कॉमिक्स और पत्रिकाओं के विस्तृत प्रकाशन समूह के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डायमंड समूह के आधिकारिक परिचय के अनुसार, डायमंड बुक्स की औपचारिक शुरुआत 1970 में हुई। आगे चलकर इसका प्रकाशन संसार कथा-साहित्य, कथेतर साहित्य, बाल साहित्य, अध्यात्म, स्वास्थ्य, आत्म-विकास, जीवनी, लोकप्रिय साहित्य और समसामयिक विषयों तक विस्तृत हुआ। 

समूह की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, डायमंड का प्रकाशन-संग्रह लगभग 10,000 शीर्षकों और 20 भाषाओं तक फैला है। गृहलक्ष्मीक्रिकेट टुडेसाधना पथ और साहित्य विमर्श जैसी पत्रिकाएँ भी इस व्यापक प्रकाशन यात्रा का हिस्सा रही हैं। समय के साथ समूह ने ई-बुक, ऑडियोबुक, यूट्यूब और सोशल मीडिया प्रकाशन जैसे नए माध्यमों को भी अपनाया। 

डायमंड कॉमिक्स के माध्यम से भारतीय परिवेश और संवेदनाओं से जुड़े अनेक लोकप्रिय पात्रों को देशभर के पाठकों तक पहुँचाने में भी नरेन्द्र कुमार वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्टूनिस्ट प्राण के रचे हुए चाचा चौधरी, साबू, बिल्लू और पिंकी जैसे पात्र स्वतंत्र कॉमिक पुस्तकों के रूप में घर-घर पहुँचे और अनेक पीढ़ियों के बचपन की स्मृतियों का हिस्सा बने। स्वतंत्र विवरणों के अनुसार, डायमंड कॉमिक्स की शुरुआत 1978 में हुई और चाचा चौधरी को 1981 में स्वतंत्र कॉमिक-बुक स्वरूप मिला। 

नरेन्द्र कुमार वर्मा का 10 जुलाई 2026 को 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद देशभर के लेखकों, प्रकाशकों, पाठकों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने शोक व्यक्त करते हुए इसे भारतीय प्रकाशन जगत की बड़ी क्षति बताया। 

प्रार्थना सभा का समापन दो मिनट के मौन और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने कहा कि नरेन्द्र कुमार वर्मा की दृष्टि, सादगी, उदारता, साहित्य के प्रति समर्पण और संबंधों पर आधारित नेतृत्व आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। 

परिवार ने इस कठिन समय में साथ खड़े रहने, प्रार्थनाओं, स्मृतियों, स्नेह और समर्थन के लिए सभी उपस्थित लोगों के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त की।

नरेन्द्र कुमार वर्मा आज भले ही प्रत्यक्ष रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कहानी उन पुस्तकों, लेखकों, पाठकों, संबंधों और संस्कारों में जारी है, जिन्हें उन्होंने अपने जीवन से समृद्ध किया।

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