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आज की हिंदी युवा पीढी की हिंदी बन गई है — सूर्यकुमार पांडेय

दिल्ली: देश की अग्रणी साहित्यिक संस्था “हिंदी की गूंज” के तत्वावधान में आयोजित काव्य एवं विचार गोष्ठी हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर ऑनलाइन आयोजित हुई। कार्यक्रम की शुरुआत संस्था के संयोजक नरेंद्र सिंह नीहार की भूमिका एवं स्वागत वक्तव्य से हुई। मंजू शर्मा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर साहित्यिक संध्या का शुभारंभ किया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार सूर्यकुमार पांडेय ने अपने सारगर्भित वक्तव्य में कहा कि “आज की हिंदी युवा पीढी की हिंदी बन गई है।” उन्होंने कहा कि हिंदी निरंतर बदलते समय के साथ आगे बढ़ रही है और आज के युवा हिंदी को नए माध्यमों तथा नई अभिव्यक्तियों के साथ समृद्ध कर रहे हैं। उन्होंने रचनाकारों का आह्वान करते हुए कहा कि कवि को भविष्यद्रष्टा होना चाहिए। आज लिखें, लेकिन भविष्य को ध्यान में रखकर लिखें। साहित्य केवल वर्तमान का चित्रण न करे, बल्कि आने वाले समय की आहट को भी पहचानने का प्रयास करें।

गोष्ठी में देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े साहित्यकारों एवं कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदी की समकालीन संवेदना, सामाजिक सरोकार और बदलते समय को स्वर दिया। डॉ रवीन्द्र कुमार (सह आचार्य,एन सी ई आर टी)  ने अपने वक्तव्य में कहा कि हम जो भी कार्य करें. उसमें निरन्तरता बनी रहनी चाहिए तभी हम सफल हो सकते हैं। मुंबई की वर्षा महेश तथा दिल्ली की तरुणा पुंडीर, बंगाल की अलका सोनी सहित अन्य रचनाकारों ने काव्य पाठ किया। उनकी रचनाओं में जीवन, संवेदना, स्त्री-अस्मिता, सामाजिक चेतना और हिंदी के प्रति अनुराग के विविध स्वर सुनाई दिए।

विचार गोष्ठी में हिंदी के वर्तमान स्वरूप, साहित्य की सामाजिक भूमिका तथा डिजिटल युग में हिंदी की बढ़ती संभावनाओं पर भी सार्थक चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी आज केवल साहित्य की भाषा नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के संवाद, सृजन और डिजिटल अभिव्यक्ति की भी सशक्त भाषा बन रही है।

कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. ममता श्रीवास्तवा सरूनाथ ने किया। उन्होंने हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित इस गोष्ठी को हिंदी की साहित्यिक यात्रा, वर्तमान पीढ़ी और भविष्य की संभावनाओं से जोड़ते हुए सभी रचनाकारों (मंजू शर्मा ,निर्मला जोशी, रामकुमार पांडेय, अलका सोनी, डॉ रवीन्द्र कुमार, रमेश कुमार गंगेले, गिरीश चंद्र जोशी, नरेंद्र सिंह नीहार, शिखा सिंह, भावना अरोरा, नेहा गुप्ता, डॉ वर्षा महेश ,तरुणा पुंडीर, डॉ वीर सिंह रावत आदि का क्रमशः परिचय कराया तथा काव्य पाठ के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हिंदी को केवल उत्सव तक सीमित न रखकर उसे जीवन, समाज और नई पीढ़ी के साथ जोड़ने का सार्थक प्रयास हैं।

कार्यक्रम में हिंदी की गूंज से जुड़े साहित्यकारों, कवियों एवं साहित्यप्रेमियों की सक्रिय सहभागिता रही। गोष्ठी ने हिंदी दिवस की पूर्व संध्या को साहित्य, विचार और कविता के सुंदर संगम में परिवर्तित कर दिया।

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