मां है ईश्वर का सबसे
प्यारा सुंदर अवतार।
जीवन के इस उपवन में,
मां ही है फूलों की बहार।
मां का अद्भुत रूप सलोना,
कृपासिंधु परमेश्वर जैसा।
प्रेम के सागर सा लहराता
मां का अपनापन ऐसा।
मां ही धरती, मां ही जगत है,
मां ही धुरी है घर की।
मां के बिना कल्पना अधूरी
इस पूरी सृष्टि की।
त्याग, तपस्या,सेवा है मां,
मां ही है मंत्रों का जाप।
जीवन की रागिनी में मां ही
है रागों का मधुर आलाप।
मन के अंधकार में मां ही
है सूरज का उजाला।
जीवन की कड़वाहट में, मां ही
है अमृत का प्याला।
मां का आंचल सब खुशियों की
रंगारंग फुलवारी।
मां ही सींचती है इस जग में
हर जीवन की क्यारी !!!
