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मनोसंवाद मनोविज्ञान विभाग में तीन दिवसिय कार्यशाला का आयोजन

युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन एवं एचआईवी/एड्स परामर्श पर हुई विस्तृत चर्चा

वाराणसी : मनोवैज्ञानिक निर्देशन परामर्श एवं अनुसंधान केंद्र, मनोविज्ञान विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला श्रृंखला “मनोसंबाद: काउंसलिंग एंड मेंटल हेल्थ- एक्सपर्ट प्रस्पेक्टिव्स एंड प्रैक्टिसेस” का प्रथम दिवस ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शन, काउंसलिंग सेल एवं रिसर्च सेंटर के तत्वावधान में किया गया, जिसमें विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम के संरक्षक एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए. के. त्यागी ने अपने संदेश में कहा कि वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि सामाजिक आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने युवाओं को मानसिक रूप से सशक्त बनाने तथा काउंसलिंग सेवाओं को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम की संयोजक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. शेफाली वर्मा ठकराल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि “मनोसंवाद” का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक प्रबंधन एवं व्यवहारिक काउंसलिंग की वास्तविक समझ प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों को संवेदनशील, जागरूक एवं सामाजिक रूप से उत्तरदायी बनाती हैं।

कार्यशाला में एआरटीसी, आईएमएस, बीएचयू के वरिष्ठ परामर्शलाता डॉ मनोज कुमार तिवारी ने युवाओं में बढ़ते तनाव, चिंता एवं भावनात्मक असंतुलन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि सकारात्मक संवाद, आत्मविश्वास एवं उचित परामर्श मानसिक समस्याओं से उबरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विशेष वक्ता के रूप में उपस्थित एचआईवी काउंसलर मनीषा राय ने एचआईवी जागरूकता, सामाजिक संवेदनशीलता एवं परामर्श प्रक्रिया के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सही जानकारी एवं भावनात्मक सहयोग के माध्यम से एचआईवी से जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया जा सकता है तथा संक्रमित व्यक्तियों को सम्मानजनक जीवन प्रदान किया जा सकता है।

वहीं  आईएमएस, बीएचयू की एचआईवी/एड्स काउंसलर एवं मदर एंड बेबी केयर विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा पांडेय ने गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं एवं परिवारों के मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल में काउंसलिंग की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संवेदनशील परामर्श परिवारों को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।

कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. मुकेश कुमार पंथ ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस कार्यशाला की परामर्श कौशल विकास में महत्वपूर्ण आवश्यकता है जिससे विद्यार्थी विभिन्न परामर्श क्षेत्र को प्रति जागरूक होंगे, साथ ही यह भी बताया कि आगामी दिनों में विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहारिक काउंसलिंग के अनेक आयामों पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे।  सह-आयोजन सचिव डॉ. दुर्गेश के. उपाध्याय ने विद्यार्थियों को उक्त कार्यशाला से संबंधित बिंदुओं पर चर्चा की एवं डॉ. पूर्णिमा श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन विकास विश्वकर्मा एवं श्रेयाश ने किया गया।

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