बरसात का मौसम अपने साथ ठंडी हवाएं, हरियाली और राहत लेकर आता है, लेकिन यही मौसम कई तरह की संक्रामक बीमारियों और खाद्य जनित संक्रमणों (फूड पॉइजनिंग) का खतरा भी बढ़ा देता है। इस मौसम में वातावरण में नमी अधिक होने के कारण बैक्टीरिया, वायरस और फफूंद तेजी से पनपते हैं। यदि भोजन की स्वच्छता और भंडारण पर ध्यान न दिया जाए तो यही भोजन विषाक्त (दूषित) होकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। हर वर्ष मानसून के दौरान दूषित भोजन से बीमार होने वाले लोगों की संख्या बढ़ जाती है, इसलिए इस मौसम में विशेष सतर्कता बरतना आवश्यक है।
क्या है भोजन विषाक्तता?
भोजन विषाक्तता (Food Poisoning) वह स्थिति है जब दूषित भोजन या पानी के माध्यम से हानिकारक जीवाणु, वायरस, फफूंद या उनके द्वारा उत्पन्न विषैले पदार्थ शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। ये सूक्ष्मजीव भोजन को इस प्रकार संक्रमित कर देते हैं कि उसका सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो जाता है। कई बार भोजन देखने और सूंघने में सामान्य लगता है, लेकिन उसमें मौजूद सूक्ष्मजीव गंभीर बीमारी पैदा कर सकते हैं।
बरसात में खतरा क्यों बढ़ जाता है?
मानसून के दौरान वातावरण में नमी और मध्यम तापमान बैक्टीरिया तथा फफूंद के विकास के लिए आदर्श परिस्थितियां तैयार कर देते हैं। यदि पका हुआ भोजन लंबे समय तक खुले में रखा जाए या उसे सही तापमान पर सुरक्षित न रखा जाए तो उसमें तेजी से जीवाणु बढ़ने लगते हैं। बासी भोजन, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, दूषित पानी और अस्वच्छ रसोई इस खतरे को और बढ़ा देते हैं।

इसके अलावा कच्चे मांस, दूध, डेयरी उत्पाद और पके हुए भोजन को एक साथ रखने से भी संक्रमण फैल सकता है। भोजन बनाने के बाद उसे लंबे समय तक कमरे के तापमान पर छोड़ देना भी फूड पॉइजनिंग का बड़ा कारण है।
भोजन विषाक्तता कैसे होती है?
विशेषज्ञों के अनुसार भोजन विषाक्तता मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है। पहली स्थिति में जीवित जीवाणु भोजन के साथ शरीर में प्रवेश करते हैं और आंतों में विषैले पदार्थ उत्पन्न करते हैं। दूसरी स्थिति में भोजन में पहले से ही जीवाणुओं द्वारा बनाए गए विषैले रसायन मौजूद रहते हैं। ऐसे भोजन का सेवन करते ही कुछ घंटों के भीतर लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
प्रमुख लक्षण
दूषित भोजन खाने के बाद निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं—
- तेज उल्टी और दस्त
- पेट में दर्द और मरोड़
- सिरदर्द एवं चक्कर आना
- बुखार
- कमजोरी और निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन)
यदि उल्टी और दस्त लगातार होते रहें तो शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी हो सकती है, जो बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

