NEW English Version

वैज्ञानिकों ने क्वांटम एंटैंगलमेंट लॉस को मात देने का तरीका खोज निकाला है

वैज्ञानिकों ने एक सटीक समय पर की गई फ्लिप प्रक्रिया को लागू करके विस्तृत समय तक एंटैंगलमेंट को संरक्षित रखने का तरीका खोज निकाला है। इससे यह साबित होता है कि क्वांटम प्रणालियों में कौन सी प्रक्रिया लागू करनी है, उतना ही महत्वपूर्ण यह भी है कि कब कार्रवाई करनी है। यह तकनीक भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों के भीतर मौजूद नाजुक क्वांटम लिंक्स को हार्डवेयर में बिना कोई बदलाव किए लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है।

एंटैंगलमेंट एक ऐसा गुण है जो एक कण की अवस्था को दूसरे दूर स्थित कण की अवस्था से जोड़ता है। क्वांटम प्रणालियों में एंटैंगलमेंट एक अनिवार्य संसाधन है। हालांकि, वातावरण के साथ परस्पर क्रिया करने पर एंटैंगलमेंट क्षीण या कमजोर हो सकती है।

चित्र 1. दो परस्पर जुड़े कणों का चित्रण। एक कण पर की गई क्रिया दूसरे कण को ​​भी उसी प्रकार प्रभावित करेगी, भले ही वे अलग-अलग वातावरण में हों।

दो परस्पर एंटैंगल कणों की कल्पना कीजिए, जिनमें से प्रत्येक दो अवस्थाओं में विद्यमान हो सकता है- एक उत्तेजित अवस्था और एक स्थिर अवस्था। यदि इन्हें अकेला छोड़ दिया जाए, तो प्रत्येक कण उत्तेजित अवस्था से स्थिर अवस्था में लुप्त होने लगता है, ठीक उसी प्रकार जैसे कोई परमाणु अपने परिवेश में ऊर्जा खोता है। ऐसा होने पर कणों के बीच का एंटैंगलमेंट कमजोर हो जाता है। आश्चर्यजनक रूप से एंटैंगलमेंट एक निश्चित समय में समाप्त हो सकता है- लुप्च होने की प्रक्रिया पूरी होने से काफी पहले। भौतिक विज्ञानी इस अचानक लुप्त होने को ‘बंधन की अचानक अंत’ कहते हैं।

चित्र 2. वातावरण में शोर के कारण समय के साथ एंटैंगलमेंट कमजोर या क्षीण हो सकता है, या अचानक लुप्त भी हो सकता है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरआरआई), कैलगरी विश्वविद्यालय और लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस लुप्त होने की प्रक्रिया को टालने की चुनौती स्वीकार की। इस अध्ययन को आंशिक रूप से डीएसटी के प्रमुख राष्ट्रीय क्वांटम मिशन द्वारा वित्त पोषित किया गया था।

शोधकर्ताओं के एक समूह ने अचानक लुप्त होने की प्रक्रिया को टालने का एक कारगर तरीका खोज निकाला। उन्होंने सबसे पहले अपने ऑप्टिकल सेटअप में दो-स्तरीय प्रणाली की नकल की। ​​प्रकाश में ध्रुवीकरण नामक एक गुण होता है जो प्रकाश तरंगों के दोलन की दिशा बताता है। मान लीजिए कि प्रकाश या फोटॉन—प्रकाश के कण—दो अलग-अलग ध्रुवीकरण रूपों में मौजूद हैं । उन्होंने ऊर्ध्वाधर ध्रुवीकरण को उत्तेजित अवस्था और क्षैतिज ध्रुवीकरण को मूल अवस्था माना। ध्रुवीकरण को बदलने के लिए उपयोग किए जाने वाले एक ऑप्टिकल उपकरण, वेवप्लेट का उपयोग करके, वे ध्रुवीकरण को ऊर्ध्वाधर से क्षैतिज में नियंत्रित कर सकते थे, जिससे कणों के मूल अवस्था में क्षय को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता था।

उत्तेजित अवस्था में मौजूद कणों के प्राकृतिक क्षय से मूल अवस्था में लौटने देने के बजाय, उन्होंने एक सुनियोजित प्रक्रिया अपनाई जिससे मूल और उत्तेजित अवस्थाओं में मौजूद कणों की संख्या आपस में बदल गई। इस प्रक्रिया का प्रभाव क्षय प्रक्रिया के दौरान इसके लागू होने के समय पर निर्भर करता था । समय का चयन करके, उन्होंने सभी कणों के मूल अवस्था में क्षय को विलंबित किया या एंटैंगलमेंट के नुकसान को विलंबित किया।

“मेरे लिए, इस परिणाम का मूल यह है कि समय केवल एक प्रयोगात्मक विवरण नहीं है; यह एक नियंत्रण संसाधन हो सकता है,” यह बात क्वांटम सूचना और कंप्यूटिंग (क्विआईसी) प्रयोगशाला के समूह प्रमुख और आरआरआई में वरिष्ठ प्रोफेसर उर्बासी सिन्हा ने कही, जिन्होंने इस अध्ययन का नेतृत्व किया।

चित्र 3. ऑपरेशन का स्थान निर्धारण एंटैंगलमेंट के क्षय को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है।

सही समय पर किया गया फ्लिप न केवल अचानक होने वाली लुप्तता को टालता है, बल्कि उसे होने से भी रोक सकता है। टीम इसे बचाव कहती है।

“जब आप इस प्रक्रिया को लागू कर रहे होते हैं, तो क्षय के दौरान विकास की कितनी अवधि बीतने के बाद आप इस एकल फ्लिप ऑपरेशन को लागू करते हैं, यह निर्धारित करेगा कि आप अचानक लुप्त होने से बचते हैं, उसमें देरी करते हैं या उसे तेज करते हैं,” आरआरआई में क्यूआईसी लैब के क्वांटम वैज्ञानिक और नए अध्ययन के प्रमुख लेखक सौम्या रंजन बेहरा कहते हैं। यह शोध पत्र जुलाई में अमेरिकन फिजिकल सोसाइटी के फिजिकल रिव्यू ए में प्रकाशित हुआ था।

क्वांटम कंप्यूटरों में, क्वांटम सूचना के क्षय होने से पहले उसके अस्तित्व की अवधि सीमित होती है। प्रयोग से पता चलता है कि इस प्रकार की सीमा की उपस्थिति में, किसी क्रिया का समय एंटैंगलमेंट के भाग्य को बदल सकता है।

क्यूआईसी प्रयोगशाला में, जो सैद्धांतिक और प्रायोगिक विशेषज्ञों के सामंजस्यपूर्ण कार्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, इस अध्ययन के प्रायोगिक परिणामों ने वैज्ञानिकों को आश्चर्यचकित कर दिया। यह प्रयोग क्वांटम प्रणालियों द्वारा अपने परिवेश में सूचना खोने के दो मानक पाठ्यपुस्तक मॉडलों में से किसी में भी फिट नहीं बैठता था।

इसलिए लगभग एक वर्ष तक सिद्धांतकारों ने डेटा को समझने के लिए विभिन्न विवरणों का अध्ययन किया। अंततः उन्हें एहसास हुआ कि प्रयोग ‘गलत’ नहीं था। बल्कि यह ठीक उस वक्र पर स्थित था जो इन दोनों ढांचों को दोनों सिरों पर जोड़ता है। संक्षेप में, उन्होंने वह ‘ट्यूनिंग पैरामीटर’ खोज लिया जो प्रयोग को दोनों ढांचों के बीच स्थानांतरित करने में सक्षम बनाता है। इसलिए अब इन दोनों ढाँचों के लिए दो अलग-अलग सेटअप नहीं हैं। यह एकल सेटअप चुने गए ट्यूनिंग पैरामीटर के आधार पर नॉयज मॉडल और उनके बीच के सभी प्रकारों का प्रतिनिधित्व कर सकता है। साभार : पीआईबी

Book Showcase

Best Selling Books

Shri Durgasaptashati Sachitra

By Gorakhpur Gita Press

₹100

Book 2 Cover

Stop Letting Everything Affect You

By Daniel Chidiac

₹190

Truth without apology

By Acharya Prashant

₹240

30 Days to Better English

By Norman Lewis

₹199

Translate »