NEW English Version

राखी कोरा रक्षा कवच नहीं, नारी-सम्मान का संकल्प बने

रक्षाबंधन केवल कलाई पर बंधा हुआ एक धागा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की उस विराट चेतना…

“संस्कृत”  हमारी सांस्कृतिक चेतना और ज्ञान परंपरा की अमर भाषा

भारत की पहचान केवल उसकी प्राचीन सभ्यता, विविध संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा से ही नहीं, बल्कि…

रक्षाबंधन: स्नेह, विश्वास और भाई बहन के अटूट रिश्ते का पर्व

भारतवर्ष को प्राचीन काल से ही अपनी समृद्ध आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं के लिए जाना…

विकसित भारत की राह में जर्जर शिक्षा व्यवस्था सबसे बड़ा सवाल

भारत आज वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है। एक…

अंतरिक्ष में भारत की निजी शक्ति एवं वैज्ञानिक सामर्थ्य की उड़ान

भारत की अंतरिक्ष यात्रा अब केवल सरकारी संस्थानों और वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रह गई…

चंद्रयान से गगनयान तक : भारत की अंतरिक्ष यात्रा और नए युग का उदय

आकाश सीमा नहीं, बल्कि संभावनाओं की शुरुआत है।" यह कथन आज के भारत पर अक्षरशः लागू…

कश्मीर पर अमेरिकी सुर बदलेः भारत का कद बढ़ा, पाक बेचैन

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का 19 अगस्त 2026 को श्रीनगर में दिया गया यह बयान कि…

भगवान के दरबार में भी वीआईपी और”पैसे” से जल्दी दर्शन क्यों …..?

भारत केवल मंदिरों का देश नहीं है, यह आस्था का देश है। यहां तीर्थयात्रा केवल धार्मिक…

बदलती सामाजिक संवेदनाओं में वृद्धों को चाहिए उजाले

विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस समाज के अंतर्मन को झकझोरने एवं वृद्धों की त्रासद स्थितियों पर सोचने…

जहाँ बुज़ुर्ग सम्मानित होते हैं, वहीं संस्कार जीवित रहते हैं

"मातृदेवो भवः, पितृदेवो भवः"—भारतीय संस्कृति का यह अमर संदेश केवल धार्मिक उपदेश नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन का…

Translate »