NEW English Version

बुजुर्गों के भरण-पोषण के लिये एक सराहनीय पहल

भारतीय संस्कृति में माता-पिता को देवतुल्य माना गया है-“मातृदेवो भव, पितृदेवो भव” केवल शास्त्रों की पंक्ति…

अपने भीतर के हनुमान को जगाने का पर्व

हनुमान जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव जीवन के चरित्र-निर्माण, आत्मबल, संयम, सेवा और…

बीमा सुरक्षा का माध्यम बने, न कि मुनाफे का जाल

बीमा का मूल उद्देश्य जीवन की अनिश्चितताओं से सुरक्षा प्रदान करना है। यह व्यवस्था व्यक्ति को…

जलवायु परिवर्तनः भविष्य नहीं, वर्तमान का महाविनाशकारी संकट

आज मानव सभ्यता जिस सबसे बड़े संकट के सामने खड़ी है, वह युद्ध, महामारी या आर्थिक…

धर्म, जाति और धर्मांतरण: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय

धर्म, जाति और धर्मांतरण का प्रश्न भारत के सामाजिक, संवैधानिक और राष्ट्रीय जीवन से जुड़ा अत्यंत…

मर्यादा, सुशासन और शांति के विश्वनायक श्रीराम

रामनवमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के नैतिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का पुण्य…

तेज होती हथियारों की होड़ और अस्थिर होती विश्व व्यवस्था

तेज होती हथियारों की होड़ और अस्थिर होती विश्व व्यवस्था आज मानव सभ्यता के सामने सबसे…

धर्मक्रांति का विलक्षण प्रयोग है योगक्षेम वर्ष

आज का युग विज्ञान, तकनीक और भौतिक प्रगति का युग माना जाता है, लेकिन इसी के…

सृष्टि संतुलन के लिये वनों की पुकार सुननी होगी

21 मार्च को प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस केवल एक प्रतीकात्मक उत्सव नहीं, बल्कि…

गौरैया का कलरव एवं ऊर्जा का खत्म होना बड़ी चुनौती

एक समय था जब सुबह की शुरुआत घर-आंगन में चहकती गौरैया की मधुर ध्वनि से होती…

Translate »