भारत की सांस्कृतिक परंपरा में अनेक पर्व ऐसे हैं, जो केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं,…
Tag: सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"
गरीबी मिटाने के लिए दया नहीं, अवसर और अधिकार देने होंगे
गरीबी केवल खाली जेब का नाम नहीं है, बल्कि यह उन अनगिनत अभावों का प्रतीक है,…
थाली में अन्न, हर चेहरे पर मुस्कान..भूखमुक्त विश्व का यही हो अभियान
भोजन जीवन का आधार है। अन्न केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि शरीर की ऊर्जा,…
ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण के बिना समृद्ध भारत का सपना अधूरा
भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांवों की आत्मा वहां की महिलाओं के श्रम,…
सोशल मीडिया, एआई अऊ प्रिंट मीडिया मं छत्तीसगढ़ी भाखा के बदलत भूमिका
छत्तीसगढ़ के माटी मं जऊन मिठास हे, ओही मिठास हमर बोली-भाखा मं घलो बसे हे। छत्तीसगढ़ी…
पत्रकारिता का आईना: क्या लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अब भी उतना ही मज़बूत है?
लोकतंत्र में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के साथ पत्रकारिता को चौथा स्तंभ कहा गया है। इसका…
अब तो धरती की कदर कर लो, वरना बारूद के ढेर पर बैठी मानवता को संभलने का मौका भी नहीं मिलेगा
धरती केवल मिट्टी, पत्थर, पहाड़ और नदियों का समुच्चय नहीं है, बल्कि यह समूची सृष्टि की…
अभी भी बालिकाओं के उत्थान पर बहुत कुछ करना शेष
बेटी केवल घर की मुस्कान नहीं, वह समाज के भविष्य की आधारशिला है। जिस समाज में…
शक्ति आराधना का पर्व है शारदीय नवरात्र, घट स्थापना से होता है शुभारंभ
भारत की सनातन संस्कृति में पर्व-त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को संस्कारित करने वाली…