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पितृपक्ष

शीश झुकाकर नमन करें हम पूर्वजों की पावन आशीषों को जिन्होंने दिखलाया जीवन पथ मिटा के…

दुर्गा स्तुति

जगजननी मां तुझे नमन है, भवतारिणी मां तुझे नमन। ब्रह्मस्वरूपिणी तुझे नमन है, भयहारिणी मां तुझे…

रक्षाबंधन

प्रीति की धरती, ममता का आकाश है रक्षाबंधन। भाई बहन के प्रेम से मिश्रित हास है…

हे ग्रीष्म! तुम्हें प्रणाम

हे तप्त सूर्य की स्वामिनी ! तुम हो ऊर्जा का अनन्य उद्गम। अपनी प्रखर ज्योति से…

मातृभूमि वंदन

हे जन्मदायिनी धरिणी जननि, हे जन्मभूमि, मातृभूमि, हम तुझको शीश नवाएं, हम गीत तेरे ही गाएं।

गुरु वंदन

ज्ञानामृत का पान हमें, प्रति दिवस कराते हैं गुरुवर। शिष्य बने कंगूरा, नींव शिला बन जाते…

तमसो मां ज्योतिर्गमय

अंतहीन रजनी के तिमिर में नन्हीं दीपशिखा है प्रज्ज्वलित। अभिलाषाओं की चिंगारी गहन अंधेरे  में भी…

प्रेम दीप्ति

मधुर मुक्त आभा है सुरभित पवन, प्रेम ही प्रेम का हो रहा है सृजन। हैं नहला…

मौसम ने बदला रंग

वर्षा ऋतु की मनोहारी छटा, प्रकृति का नव श्रृंगार, हरियाली, उमंग और कर्म का संदेश समेटती…

योग : जीवन का महामंत्र

सुबह सबेरे तन और मन को  जो दे नवजीवन का वरदान। श्वासों की गति को समझाए…

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