न्यायधानी के ख्याति प्राप्त पत्रकार, साहित्यकार सुरेश सिंह बैस को 18 जुलाई 2026 को एबीकेएमएस फाउंडेशन…
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न्याय : सभ्यता का आधार और मानवता का सार्वभौमिक सत्य
"जहाँ न्याय नहीं, वहाँ शांति नहीं; और जहाँ शांति नहीं, वहाँ सभ्यता का अस्तित्व भी संकट…
सर्प : भारतीय संस्कृति, पौराणिक मान्यताएँ और वैज्ञानिक सत्य
पृथ्वी पर जीवन की विविधता जितनी अद्भुत है, उतनी ही रहस्यमयी भी। इस जैव विविधता में…
पालनहार और सारे जग के नाथ : भगवान जगन्नाथ
भारत की सनातन संस्कृति में भगवान जगन्नाथ केवल एक देवता नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि के पालनहार,…
कौशलयुक्त युवा : विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति
किसी भी राष्ट्र की वास्तविक संपदा उसके प्राकृतिक संसाधन, विशाल भवन, उद्योग या खनिज भंडार नहीं…
“अकती के अंधियार मा उजाला” सुनीता दीदी
मंगरू कका – परंपरा के नाम पर अड़े रहय्या गांव के बुजुर्ग रामसाय – गरीब किसान,…
सादगी ही व्यक्तित्व की सबसे सुंदर पहचान
सादा जीवन, उच्च विचार" केवल एक आदर्श वाक्य नहीं, बल्कि सफल और संतुलित जीवन का मूल…
पृथ्वी पर तेजी से बढ़ती जनसंख्या : विकास, संसाधन और भविष्य की चुनौती
मानव सभ्यता के विकास का इतिहास जितना पुराना है, जनसंख्या वृद्धि का इतिहास भी उतना ही…
जंगल के बीच गूंजी किलकारी: मूसलाधार बारिश और अंधेरी रात में बस बनी प्रसूति कक्ष, यात्रियों ने रची इंसानियत की अनुपम मिसाल
आज के समय में जब आए दिन संवेदनहीनता, स्वार्थ और सामाजिक विघटन की खबरें सुर्खियां बनती…
बाल सखा को भेंट की अपनी चर्चित पुस्तक “बोलती परछाइयाँ”, बचपन की यादें हुईं फिर जीवंत
वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं लेखक सुरेश सिंह बैस 'शाश्वत' ने अपने बाल सखा संजय शुक्ला के…